हॉस्पिटल में बेड नहीं तो मैरिज गार्डन को बनाइए कोविड सेंटर

कोरोना मरीजों को उपलब्ध कराइए ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन

विशेष खबर
हृदेश धारवार
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भोपाल। मध्यप्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सोमवार को राजधानी भोपाल में 5200 सैंपल कोरोना जांच के लिए भेजे गए थे, जिसमें 1456 लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिस तरह से कोरोना मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है इससे सरकार द्वारा की जाने वाली चिकित्सा सुविधा भी कम पडऩे लगी है। कोरोना मरीज दिन भर हॉस्पिटल में बेड खाली होने का इंतजार करते रहते हैं और शासन द्वारा जो हेल्प लाइन नंबर जारी किए गए हैं, वहां से भी मरीजों को सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा निजी चिकित्सालयों में डॉक्टर द्वारा रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने की सलाह दी जा रही है, लेकिन वो भी मरीजों आसानी से नहीं मिल पा रहा है। कोरोना मरीजों के लिए शासन को अब हॉस्पिटल के अलावा वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में भी विचार करना चाहिए। पिछले साल जब इतनी भयावह स्थिति नहीं थी, तब शासन ने रेलवे की बोगी को क्वारेंटाइन सेंटर के रूप में तब्दील कर दिया था। इस बार भी शासन को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मैरिज गार्डन और सामुदायिक भवन को कोविड सेंटर के रूप में तैयार करके इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि कोरोना मरीजों के भीतर जो भय का वातावरण बना हुआ है, उससे उन्हें राहत मिल सके। साथ ही शासन को मैरिज गार्डन और सामुदायिक भवनों में ऑक्सीजन की व्यवस्था भी करना चाहिए। क्योंकि जिस तरीके प्रतिदिन कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उससे आगे स्थिति और भयावाह हो सकती है। इसी को देखते हुए हम राष्ट्रीय हिन्दी मेल की तरफ से शासन को यह सुझाव देना चाहते हैं कि जन हित में निजी हॉस्पिटल के अलावा निजी संपत्ति को भी जनहित में उपयोग किया जाए, ताकि कोरोना मरीजों का बेहतर उपचार हो सके। साथ ही हम यह भी बताना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश के बाद भी निजी हॉस्पिटल द्वारा कोरोना मरीजों से उपचार के लिए मोटी राशि वसूली जा रही है। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी निजी चिकित्सालयों ने दर सूची हॉस्पिटल में नहीं लगाई है। निजी हॉस्पिटल की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए भी शासन को कठोर कदम उठाने की जरूरत है। उम्मीद करते हैं कि शासन द्वारा जल्द ही इस दिशा में कोई उचित निर्णय लिया जाएगा।