गांवों में आइये शिवराज-महाराज चलित अस्पताल लाईये वरना…

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास
मो.9617565371

मध्यप्रदेश में हो या देश में यह मानव इतिहास का सबसे बुरा और संकट की भयावह घड़ी है। इस आपदा में इस अवसर पर जब हम सुबह उठते ही अपनों के, दोस्तों के बड़े-बड़ों के छोटों के इस दुनिया से उठने की खबर सुनते हैं तब सरकारों को यह निर्णय करना ही पड़ेगा कि कम से कम अगले चुनाव अर्थात 2023 तक मध्यप्रदेश में कोई राजनीति की बात नही करेगा। यदि बात होगी तो केवल एक ही होगी और यह होगी कोरोना से मानव जीवन की जान कैसे बचायी जाये। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मुख्यमंत्री कोविड- उपचार योजना का संकल्प लिया है और वे इस संकल्प के जरिये गांव-गांव किल कोरोना अभियान चलाना चाहते हैं, यंू कहा जाये कि मुख्यमंत्री के मन को कोरोना ने जितना विचलित या उद्वेलित किया है शिवराज शायद ही अपने जीवन में कभी इतने विचलित नहीं हुए होंगे। शिवराज सिंह चौहान की मनोदशा तो हम आप नहीं समझ सकते परन्तु उनकी धर्म पत्नि श्रीमती साधना सिंह और दोनों पुत्रों को अहसास हो गया कि मुख्यमंत्री पद का ताज आज की तारीख में कांटों भरा ऐसा ताज है जिसमें रोज एक कांटा बाहर आता है तो 100 चुभने के लिए तैयार हो जाते हैं। फिर भी आज हम अपनी विशेष रिपोर्ट में यह जिक्र करने में पीछे नहीं रहेंगे कि शिवराज सिंह चौहान का आत्म विश्वास गजब का है। 24 ङ्ग7 काम पर है। बस उन्हें जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करने में जिस तरह की सुनियोजित कार्य योजना मिलनी चाहिए उसकी कमी है, इसी का फायदा उनके विरोधी और ‘मीडियाÓ का एक समूह हमेशा उठाता है और कोशिश में रहता है कि मुख्यमंत्री को तनाव में रखा जाए। परंतु हम आज अपने इस विशेष रिपोर्ट में उन 54000 गोवों की चिंता कर रहे है, मुख्यमंत्री जी जिनके लिए आपने ग्राम पंचायत स्तर तक समितियां बना दी है। यह कहने में संकोच नहीं है कि गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा इन समितियों को गांव-गांव में प्रभावशाली ढंगी से काम करने के लिए बकायदा दिशा-निर्देश भी दे रहे है अच्छा है परंतु साधनों एवं चिकित्सा के क्षेत्र में आवश्यक हेल्थ वर्करों की कमी को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। यहां पर यह लिखने में संकोच नहीं है बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ बेहतर समन्वय की कमी नौकरशाही में इस वक्त दुर्भाग्यपूर्व विषय है, वरना डॉ. संजय गोयल आयुक्त स्वास्थ्य थे तो नीचे वालें को कह दिया गया था कि डॉ. संजय गोयल की नहीं हमारी सीधे सुनना तो नीचे वाले चाहे छबि भारद्वाज हों या फिर निशांत बड़बड़े हो कोई सुनता ही नहीं था तो बेचारे हट गये। लेकिन आपदा काल इगो का विषय उठाने वालों को शिवराज जी ने खुला क्यों छोड़ा है, यह खोज का विषय है। रहा सवाल गांव-गांव में शिवराज सरकार से आखिर गांव वाले क्यों मिन्नते कर रहे है इस सवाल का उत्तर शिवराज जी खोजना जरूरी है और इसका उत्तर आप अकेले नहीं ढूंढ पायेंगे आपको अपने सारथी महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया को साथ लेकर गांवों के लिए कुछ बड़ा करना होगा। आपको पता होना चाहिए गांवों में आबादी चाहे बड़ी हो या छोटी एक हजार लोग तो न्यूनतम रहते ही है। हमारे पास गांव है 54000 इनके लिए बता दे सबको अस्पताल चाहिए, डॉक्टर चाहिए, नर्स चाहिए और आपकी वही टीम जिसे आपने जागरूकता के लिए तैयार किया है। अब जरूरत है कि महाराज अपने चहेते परिवहन मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत की ड्यूटी लगाये कि सबसे पहले मध्यप्रदेश में खड़ी 60000 बसों का अधिग्रहण किया जाए और उन बसों को सरकार डीजल, पेट्रोल, ड्रायवर की तनखा देकर चलित अस्पताल में परिवर्तित करते हुए हरेक गांव में कोरोना की चिकित्सा सुविधा के साथ खड़ा कर दे, और कोरोना गांव में ही रोके। लेकिन चलित अस्पताल या तो बड़े-बड़े अस्पतालों को संचालित करने कहा जाये या फिर स्वास्थ्य के क्षेत्र में समर्पित एनजीओ आगे आये और यह काम करें। लेकिन इनको भी पांच विभागों का बड़ा समन्वय चाहिए। गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा तथा परिवहन मंत्री गोविन्द सिंह राजपुत के अलावा डॉ. प्रभुराम चौधरी आगे आये वे सिंधिया समर्थक है, दूसरा चिकित्सा शिक्षा विश्वास सारंग आये ताकि 150 से अधिक नर्सिंग कॉलेजों के अतिम वर्ष की छात्र छात्राएं उपरोक्त चलित अस्पताल में कोविड प्रशिक्षण प्राप्त करें बाद में इन्हें ही नौकरी में प्राथमिकता दी जाने की घोषणा हो जाये। इसके बाद किसान कल्याण मंत्री कमल पटेल का रोल जबदस्त है, कृषि विभाग का अमला इस चलित अस्पताल की मेडिकल सुविधाओं के अलावा ग्रामीणों को जरूरत की चीजे जो आपदा के इस काल में उपयोगी हो उपलब्ध कराये। यकीन मानिये मुख्यमंत्री जी ये चलित अस्पताल जब गांव-गांव में मुख्यमंत्री कोविड उपचार योजना को सुनिश्चित करेंगे तो गांवों का कोरोना मरीज शहर में दौड़ नहीं लगायेगा, सड़कों पर लाशें नहीं बिछेगी, यह लिखने में कड़वा है परन्तु सच है कि गांवों में डर का वातावरण है जिससे लोग मर रहे है। लेकिन शिवराज-महाराज का समन्वय बेहतर हो जाये तो यह उम्मीद करना गलत नही होगा कि गांवों के कोरोना को गांवों में ही समाप्त कियाा जा सकता है, शर्त है नौकरशाही को राजनीति और ‘इगोÓ से मुक्त वातावरण के लिए तैयार किया जाए। बता दें मध्यप्रदेश के वरिवहन आयुक्त कार्यालय में तथा राजस्व विभाग के अमले में चलित अस्पताल को लेकर बेहद उत्साह है। मानव जीवन को बचाने में ग्रामीण अंचलों में भी शिवराज सरकार यह कदम उठाती है तो परिणाम अच्छे ही निकलेंगे हर गांव को कोरोना मुक्त करने का संकल्प भी पूरा होगा। और कोरोना के आड़ में राजनीति पर ताला भी डलेगा।