शिवराज ‘गांवों’ की फिक्र में सोते नहीं चलित अस्पताल हो सकता है बेहतर मॉडल : राजपूत


कोरोना संक्रमण को लेकर मुख्यमंत्री चिंतित, पटवारी, आर-आई और कोटवार हो सकते हैं कोरोना योद्धा


साक्षात्कार
विजय कुमार दास
मो.9617565371

मध्यप्रदेश में 54000 गांवों की तरफ तेजी से कोरोना संक्रमण अपने पैर पसार रहा है। कोरोना को लेकर ग्रामीणों में ‘डरÓ भर गया हैं, जिसे बिना पल गंवायें दूर करने की जरूरत है, वरना हमें इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। मध्यप्रदेश के परिवहन मंत्री ने कहा है कि ‘गांवोंÓ की फिक्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ठीक से सो नहीं पा रहे हैं। संभवत: किसान पुत्र होने के नाते कोरोना महामारी से ग्रामीणों में जो डर भर गया है और जिस डर से ग्रामीण अंचलों में लगातार मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है, वह चिंताजनक है। ‘राष्ट्रीय हिन्दी मेलÓ के इस प्रतिनिधि से परिवहन मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने यह स्वीकार किया कि ग्रामीण इलाकों में कोरोना को लेकर दहशत है। गांव का प्रत्येक व्यक्ति ‘डरÓ से भर गया हैं, उसे लगता है कोरोना हो गया तो उसकी जिन्दगी खतरे में है, हमें ग्रामीणों के इस डर को बिना समय गंवाएं समाप्त करना होगा, वरना परिणाम भयावह और खतरनाक हो जाएंगे। गोविन्द सिंह राजपूत ने एक सवाल के उत्तर में कहा कि मध्यप्रदेश में ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था जुटाने में परिवहन महकमें के प्रत्येक कर्मचारी-अधिकारी की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को आवश्यकता से अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में परिवहन विभाग ने प्रदेश के 1 लाख पुलिस बल के साथ समन्वय स्थापित करते हुए 24&7 काम किया है उसी का परिणाम है अब हमारे पास ऑक्सीजन ‘सरप्लसÓ है, किसी राज्य को जरूरत पड़ेगी तो उन्हें मध्यप्रदेश ऑक्सीजन दे भी सकता है। गांव-गांव में कोरोना की रफ्तार से परिवह मंत्री के पास खबरें लगातार पहुंच रही है, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के अनुसार गांव-गांव में क्राइसेस मैनेजमेंट कमेटी काम कर रही है। जिसमें राजस्व विभाग का मैदानी अमला विशेषकर पटवारी, कोटवार, राजस्व निरीक्षक तथा सभी नोडल अधिकारी वहां की समिति को गांवों में जागरुकता के लिए प्रेरित करते रहते हैं, जिससे थोड़ा डर कम हो रहा है। परंतु गोविन्द राजपूत ने यह स्वीकार किया कि गांवों में अंधविश्वास के चलते मरीज अस्पताल आने से डर रहे हैं और अधिकतर ग्रामीणों की मौतों का कारण ‘डरÓ ही है, जिसे दूर करना अनिवार्य है। एक सवाल के उत्तर में राजस्व एवं परिवहन मंत्री ने कहा कि चलित अस्पताल का मॉडल गांवों में कारगर साबित हो सकता है, यदि एक बस में पैरामेडिकल स्टाफ एवं सभी सुविधाओं के साथ ऑक्सीजन और दो बिस्तर वाला चलित अस्पताल बनाकर गांवों में खड़ा होगा तो ग्रामीणों का विश्वास अस्पताल के प्रति निश्चित बढ़ेगा और वे इलाज वहीं कराने लगेंगे, परंतु ‘कोविड सेंटरÓ पर गांव वाले आ नहीं रहे हैं। परिवहन मंत्री ने कहा कि वे 2-3 दिनों के भीतर अपने सागर जिले के ग्रामीण इलाकों की रिपोर्ट तैयार करके फिर मुख्यमंत्री से इस विषय में चर्चा करेंगे, हालांकि परिवहन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें स्वयं ही ग्रामीणों की रक्षा के लिए एक कारगर ठोस उपाय को लागू करने की जिम्मेदारी सौंप दी है, जिससे लाखों ग्रामीमों की जान बचायी जा सकती है। एक सवाल के उत्तर में गोविन्द सिंह राजपूत ने दावा किया है कि वे ग्रामीणों के बीच ही राजनीति से उठकर यहां तक पहुंचे हैं, इसलिए उनकी कोशिश होगी कि मुख्यमंत्री की मंशानुसार गांवों को कोरोना मुक्त करने के लिए हर संभव सभी उपाय किए जाएं, जिसमें चलित अस्पताल एक विचारणीय विषय हो सकता है। गोविन्द सिंह राजपूत ने अंत में एक सवाल के उत्तर में कहा कि राजस्व विभाग के पटवारी, आर.आई. और कोटवार सबको कोरोना योद्धा मान लेने में कोई हर्ज नहीं है। वे बेचारे जान की बाजी लगाकर मानव जीवन बचाने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से इस विषय में चर्चा कर चुके हैं। शीघ्र ही मंत्री परिषद की स्वीकृति के बाद आर.आई., पटवारी तथा काटवारों को कोरोना योद्धा घोषित किया जा सकता है।

गांवों में कोरोना है यह बात सही: कलेक्टर
मध्यप्रदेश में तीसरी लहर का आगाज गांवों से ही हो रहा है, इस बात को मैदानी प्रशासनिक अधिकारी भी मानने लगे हैं। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि से उज्जैन जिला कलेक्टर युवा आइ.ए.एस. अधिकारी आशिष कुमार सिंह ने कहा कि उज्जैन जिले में गांव-गांव की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। वास्तविकता का पता एक-दो रोज में ही लग जाएगा, क्योंकि मुख्यमंत्री द्वारा बनाई गई ग्राम पंचायत स्तर की समितियां जागरुकता से काम करने लगी है। उन्होंने स्वीकार किया कि गांवों में कोरोना पहुंच गया है, इसके रोकथाम के लिए ठोस एवं कारगर उपाय किए जाएंगे।

साक्षात्कार के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।