मोदी ने कहा शिवराज ने माना शिवराज ने कहा कमल ने अपनाया

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास
मो.9617565371


मध्यप्रदेश कोरोना के मामले में ठीक उसी तरह 11 वें स्थान पर है जिस तरह भारत पूरे विश्व में तीसरे स्थान पर भारत है। महाराष्ट्र, राज्य सबसे आगे हैं, मौतों का, मरीजों का, संक्रमण की रफ्तार के जब तक आंकड़े अंतिम होते हैं यहां आंकड़े दुगने हो जाते हैं, फिर सरकार पर आरोप लगता है ‘उद्ववÓ का प्रशासन तंत्र फेल हो गया है आंकड़े छुपाये जा रहे है। जबकि एैसा महाराष्ट्र में नहीं है राष्ट्रीय हिन्दी मेल संवाददाता की ग्राउंड रिपोर्ट है सरकार है तो सब कुछ है वरना कल का किसी को पता नहीं है। वास्तविकता के नजदीग खबर यही हैं अब महाराष्ट्र में भी अस्पतालों में बिस्तर, ऑक्सीजन और रेमडेसिविर उपलब्ध हैं सच हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में प्रशासन तंत्र गजब का है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जुबान से निकला प्रत्येक वाक्य मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए ब्रम्ह वाक्य बन गया है।
इधर मोदी ने कहा उधर शिवराज ने तत्काल फरमान जारी कर दिया। मतलब यंू समझा जाये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वाक्यों का, शब्दों का, अक्षरस: पालन करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। लेकिन इस राज्य में कोरोना महामारी के साथ-साथ किसानों की समस्या विकट है जिससे पार पाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फिलहाल कृषि मंत्री कमल पटेल को ही अपना हनुमान बना रखा है। हनुमान तो हनुमान ही है, उन्हें तो अपने राम का गदा घुमाना है सो रोज-रोज सुबह-शाम गांवों में किल कोरोना अभियान की तेजी से किटों को बांटने का काम इन दिनो कमल पटेल ही कर रहे हैं। कमल पटेल का कहना है कि कोरोना महामारी हो या किसानों का कोई भी संकट शिवराज है तो सब मुमकिन है। इसलिए आप देखेंगे खाद्, बीज, बीमा, ऋण किसानों के खाते जमा होने वाला अनुदान सबकी चिंता में कमल पटेल का बोलते-बोलते गला भी सूखने लगा है। राष्ट्रीय हिन्दी मेल की इस विशेष संपादकीय का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आदेशों के संदर्भ में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तत्परता और कृषि मंत्री कमल पटेल के अति उत्साहित सक्रियता का जिक्र सिर्फ इसलिए किया जा रहा है ताकि हम याद दिला सकें मध्यप्रदेश में नौकरशाही की भाषा रिकवरी रेट बढ़ रहा है, पोजिटिविटी घट रही है इसे गांव वाले समझ नहीं रहे है। वे कह रहे हैं प्रधानमंत्री जी ने तो कहा है गांव-गांव टेस्टिंग कराओं, गांव का कोरोना गांव में ही रोके तो कमल पटेल जी 10 प्रतिशत कोरोना संक्रमण यदि कम हुआ है तो पता लगाइये कुछ जिलों में कलेक्टर गांवों की तरफ टेस्टिंग टीम पहुंचाते क्यों नही है, दवाई भी और कड़ाई भी तो फिर चलित अस्पताल ही यदि इलाज है इसका तो मंगलाचार शीघ्र कीजिये। वरना गांव वाले यह कहने से नहीं चूकेंगे मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री ने नि:शुल्क इलाज की घोषणा की है तो पैसे के अभाव में गांव का गरीब मर क्यों रहा है।
विशेष संपादकीय के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।