राज्यपाल चाहे तो भोपाल बनेगा और खुबसूरत…

मंगू भाई पटेल

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल वैसे तो भारत के नक्शे में खुबसूरत शहरों में नवाजा जाता है। परंतु उतना खुबसूरत अभी तक नहीं बन पाया जितना कि भोपाल को राजधानी बनाते वक्त भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने इसे खुबसूरत बनाने का सपना देखा था। कारण भी साफ है कि आजादी के बाद से लेकर अभी तक यदि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा को छोड़ दिया जाए तो भोपाल की बुनियादी प्रगति और इसकी खुबसूरती को संवारने के लिए कोई बड़ा नेता सामने नहीं आया। यह बात जरूर है कि भारतीय जनता पार्टी के बुल्डोजर मंत्री रह चुके स्व. बाबूलाल गौर ने वीआईपी रोड और कुछ बड़े चौराहों का अतिक्रमण हटाकर जो सडक़ों का चौड़ीकरण किया है, वही एक खुबसूरती तालाबों के अलावा सबको बताई जाती है। लेकिन बुनियादी सच यह है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में झुग्गिबस्तियों का सैलाब पैदा करने वाले नेताओं की वोट बैंक वाली राजनीति ने इस खुबसूरत शहर को बदसूरती में बदलने का अपराध किया है और यह अपराध बदस्तूर जारी है। एक स्थान से झुग्गिबस्तियां हटाई जाती है, तो दूसरे स्थान पर नई झुग्गिबस्तियों का रातों-रात निर्माण करने में सहयोगी नेता कोरोना मास्क की तरह मुंह पर कपड़ा बांध लेते हैं। मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश में आज तक जितने भी रहे हैं, सबने भोपाल को बेहतर से बेहतर विकास की दिशा में ले जाने का अपने-अपने तरीकों से प्रयास किया, लेकिन भोपाल के पुराने शहर में आज भी सकरी गलियां, मानव मैल की बदबू, अव्यवस्थित सीेवर लाईन, आपस में सटे हुए बिजली के तार किसी दिन हिरोशिमा की तरह आग उगलने लग जाएं तो चौंकिएगा मत। इस कड़वी खबर का लब्बोलुआब यह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब रोज पौधा रोपण में निकलते हैं, लेकिन जाते वहीं हैं, जहां सडक़े खुली-खुली हैं, किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं है। लेकिन वहां कभी नहीं जाते जिन झुग्गियों में सांस लेने तक की गुंजाईश नहीं बची है। और तो और विकास का यह कौनसा पैमाना है, राज भवन के चारों तरफ रोशनपुरे की झुग्गियां राजभवन को सुरक्षा प्रदान करती है। कहने का मतलब यह है कि भोपाल का खुबसूरत न्यू-मार्केट से लेकर राजभवन झुग्गियों से घिरा हुआ है, लेकिन नियम यह है कि राजभवन के आसपास उससे ऊंची ईमारत नहीं हो सकती इसलिए झुग्गिवालों के लिए यहां पर ना तो प्रधानमंत्री आवास योजना लागू हो सकती है, और न ही अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम और यही सबसे बड़ा कारण है कि आजादी के बाद से लेकर आज तक राजभवन जब से बना है तबसे झुग्गियों से घिरा हुआ है। फिर भी हम कहते हैं भोपाल बड़ा खुबसूरत शहर है। इसलिए अब जरूरत है, भोपाल को कठोर नेतृत्व की और यह नेतृत्व मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल के अलावा कोई नहीं दे सकता। यदि महामहिम राज्यपाल मुख्यमंत्री चौहान से कहे कि हर हालत में सुरक्षा की दृष्टिकोण से भी यह जरूरी है कि राजभवन के आसपास कम से कम एक किलोमीटर का इलाका प्रदूषण रहित बनाया जाए और साफ-सुथरे भवनों का ऐसा निर्माण हो जिसमें झुग्गिवासियों की भी अधिकारिता हो, तो यकीन मानिए रोशनपुरे चौराहे की तस्वीर ही बदल जाएगी। और तो और मालवीय नगर स्थित पत्रकार भवन का मलबा हटाते हुए बिरला मंदिर के सामने से बसी झुग्गियों को भी यदि विस्थापित करते हुए बहुमंजिला ईमारतों से आच्छादित किया जाए तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी इस बेहतरी का कई दशकों तक श्रेय दिया जाएगा। मुख्यमंत्रीजी यह जानकर आप चौंकिएगा मत जिस नौकरशाह महेश नीलकंठ बुच की अवधारणाओं पर नया भोपाल बसा हुआ है, उसकी सीवर लाइन अब पूरी तरह चौपट हो चुकी है। कहने का मतलब यह है कि जिस अरेरा कालोनी में दो हजार लोगों की सीवर लाईन थी, अब वहां 25 हजार लोगों का लोड है। पुराने भोपाल की सीवर लाईन हर बरसात में घरवालों को खुद ही साफ करनी पड़ता है। कभी गंदा पानी घर पर, तो कभी नागरिक गंदे पानी में यह भोपाल की असली तस्वीर है। हम चाहते हैं कि भोपाल यदि स्वच्छता अभियान में नंबर दो पर है, तो उसकी मापदंड क्या ज्यादा से ज्यादा झुग्गी बस्तियों को बसाना है या फिर उनका बेहतर पुनर्वास है। और इस तरह के सवालों के बीच हम भोपाल में स्मार्ट सिटी बना रहे हैं। गेमन इंडिया के डूब जाने के बाद कोई भी बड़ा समूह अधोसंरचना के विकास के लिए तैयार नहीं हो पा रहा है, यह एक कड़वा सच है। जिस भोपाल को दस से पंद्रह मल्टीलेवल पार्किंग चाहिए, उस भोपाल में अब ट्राफिक जाम की चिंता तो होती ही है, लेकिन ट्रैफिक को व्यवस्थित करने का वीजन नगरीय प्रशासन के आयुक्त निकुंज श्रीवास्तव के पास नहीं है। आज की कड़वी खबर का मैसेज केवल इतना ही है कि मुख्यमंत्री को चुनाव से फुरसत नहीं मिलेगी, तब तक महामहिम राज्यपाल को राजधानी भोपाल में नेतृत्व प्रदान करना होगा। यह उम्मीद करना गैरवाजिब नहीं होगा कि लीडरशिप के अभाव में भोपाल जैसा खुबसूरत शहर, खुबसूरती को ओढ़ कर रोज सोता है, लेकिन जब जागता है तो खुबसूरती सवालों की सुबह बन जाती है। इसलिए महामहिम राजभवन से बाहर भी थोड़ा झाकिएं जनता को आपका इंतजार है। वरना भोपाल की पूरी बाउंड्री अघोषित रूप से अभिजात्य वर्ग द्वारा निर्मित अवैध कालोनियों में बदल जाएं तो चौंकिएगा मत।…