15 महीने हमारे: 15 महीने तुम्हारे हो जाए दो-दो हाथ

मध्यप्रदेश में 15 महीनों की कमलनाथ सरकार और चौथी बार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के 15 महीनों की सरकार के सिंहावलोकन का समय आ गया है। और यह सिंहावलोकन खंडवा लोकसभा क्षेत्र तथा तीन विधानसभा उपचुनाव के परिणामों से सुनिश्चित हो जाएगा कि कौन कितने पानी में हैं। यूं कहा जाए कि उपरोक्त चारों उपचुनावों को दोनों दलों के बीच मध्यप्रदेश में फिर से महाभारत की तरह एक बड़ी शुरूआत के रूप में देखा जाएगा। और यह महाभारत का एक व्यापक रिहर्सल भी होगा, जिसमें जो भी दल लाक्षागृह में पहुंचा दिया जाएगा, वही दल पांडवों का दल बनेगा। लेकिन आम जनता फिर एक बार द्रोपदी का रूप धारण करेगी। इस चुनाव में अग्निपरीक्षा के दौर से कोई और नहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को ही गुजरना है, क्योंकि दोनों दलों में चुनाव जिताने वाली टीम को भीतरघात करने वाले बड़े समूहों का खतरा है। राजनीति की समझ रखने वाले यह अच्छी तरह जानते हैं कांग्रेस के चाणक्यों ने अरुण यादव की टिकट काटकर अपने आपको सुरक्षित कर लिया है। इसलिए खंडवा लोकसभा का उम्मीदवार हार जाएगा तो जीत कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की ही होगी। और कांग्रेस का उम्मीदवार जीत गया तो भी कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के एकाधिकार के ऊपर बार-बार उठने वाला प्रश्नचिन्ह हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। मतलब कांग्रेस में महाभारत के लिए सेनापति तो तैयार है, लेकिन सेना नहीं है। ठीक इसके उलट भारतीय जनता पार्टी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के 15 महीनों की सरकार के पक्ष में सबकुछ ठीक है, इन चुनावों के परिणाम से पता चलने वाला है। एंटीइन्कंबेंसी का फिलहाल कोई फैक्टर नहीं है, क्योंकि भाजपा में पोस्टर ब्वाय जब तक शिवराज सिंह चौहान है तब किसी और को आगे बढऩे के लिए अवसर उपलब्ध नहीं है। इसलिए अब शिवराज सिंह चौहान के सामने एक मात्र विकल्प यह है कि महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया को सारथी बनाकर इस महाभारत को लड़ा जाए। वरना भीतरघातियों की रणनीति ने शिवराज-महाराज दोनों को हाशिए पर लाने की कूटनीति पर काम करना प्रारंभ कर दिया है। मतलब यह है कि कमलनाथ के 15 महीनों की सरकार की उपलब्धियां गिनाने की बजाए, कांग्रेस के लोग दिग्विजय सिंह और कमलनाथ की बिगड़ी छवि को ढंकने की रणनीति इस चुनाव में अपनाएंगे, ताकि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह कांग्रेस के एक मात्र युगल योद्धा माने जाए। इसलिए यह भी हो सकता है कमलनाथ और कांग्रेस अपनी उपलब्धियों की बजाए शिवराज सिंह चौहान की 15 महीनों की सरकार ही एंटीइन्कंबेंसी फैक्टर का पिटारा खोल के इस महाभारत को लड़ेंगे। भगवान ना करें दोनों दल गाली-गलौच पर उतर आए और बेचारी जनता फिर से एक बार द्रोपदी की भूमिका में अपनी इज्जत बचाने के लिए कांग्रेस के महारथियों की ओर देखें और शिवराज सिंह चौहान के विरोधियों के सामने असहाय मुद्रा में निर्बल होकर ऐसे परिणाम तक इस चुनाव को पहुंचा दें, जो 2023 और 2024 के दोनों आम चुनावों में महासंग्राम या महाभारत का रूप धारण कर लें तो चौंकिएगा मत। इस संडे डायरी का लब्बों लुआब यह है कि भारतीय जनता पार्टी हो या कांग्रेस हम दोनों दलों से अपेक्षा करते हैं कि महाभारत लडि़ए या लंका दहन करिए। बस ध्यान इतना रखिए कि लोकतंत्र की मर्यादाएं, जो बिखरने की कगार पर है उसे बचा लिया जाए। अपनी बात रखने का अधिकार सभी नेताओं को है, लेकिन कुछ उत्साहीलाल नेता ऐसे भी हैं, जिन्हें तालियों से ज्यादा गालियों पर भरोसा है और इस तरह के आयटम दोनों दलों में हैं। यदि आप मर्यादाओं को लांघकर महाभारत लडऩे की फिर से कोशिश करेंगे तो यह एक 21वीं सदी का वह अवसर होगा जिसमें मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने के सारे सपने अधूरे रह जाएंगे। इसलिए सत्ताधारी दल को आलोचनाएं सहने का पराक्रम करना पड़ेगा और विपक्ष को आलोचना करते समय जुबान फिसलने से अपने आपको ही रोकना पड़ेगा। यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि मध्यप्रदेश में खंडवा लोकसभा और 3 विधानसभाओं के उपचुनावों में जनता कैसा निर्णय लेती है, लेकिन मालवा निमाड़ के 65 प्रतिशत मतदाताओं में इस बात को लेकर बड़ा गुस्सा है कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने सरकार जानबूझकर गंवाई है। और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का बलिदान बेकार गया है। जबकि दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी में भाजपा कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर कोई उत्साह नहीं है कि उनकी मेहनत से सरकार बनी है। लेकिन आज भाजपा की सरकार है इस बात से वे इंकार नहीं करते हैं और यह कहने में नहीं चूक रहे हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए भाजपा का हर कार्यकर्ता पोलिंग बूथ स्तर पर पूरी तरह तैयार है और ये चारों चुनाव सिर्फ इसलिए जीत कर दिखाएगा, क्योंकि उसके साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हर वक्त खड़े है। इसलिए सावधानी केवल इस बात की रखी जाएं कि इस चुनाव में धन और बल के दुरुपयोग को रोका जाए, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। बस महाभारत को लडऩे के लिए वायदों का, घोषणाओं का जो अ और श है वह नियंत्रित होना चाहिए। क्योंकि 15 महीने की सरकार हमारी है और 15 महीनों की सरकार तुम्हारी थी, इसी बात पर दो-दो हाथ वाला यह एक महाभारत का रिहर्सल है इसमें कोई संदेह नहीं है। – संडे डायरी
विजय कुमार दास