हम क्षय रोग पर तभी विजय पा सकते हैं जब इस लड़ाई में सभी एक साथ आएं क्योंकि इसके लिए जन आंदोलन की आवश्यकता है: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में क्षय रोग पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री मनसुख मंडाविया, केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री महेंद्र भाई मुंजपारा और श्रीमती भारती प्रवीण पवार भी उपस्थित थीं। सम्मेलन के दौरान विभिन्न नीतिगत हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श करते हुए जमीनी स्तर पर लिंग-संवेदनशील नीतियों के कार्यान्वयन का समर्थन करने के लिए सांसदों के समर्थन को प्राप्त करने का प्रयास किया गया और प्रतिभागियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई ताकि लिंग-अनुकूलक्षय रोग देखभाल को भी सुनिश्चित किया जा सके।

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इस अवसर पर अपने संबोधन में, उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने 2025 तक ‘क्षय रोग मुक्त भारत’ अभियान में लोगों को ‘प्रमुख रूप से भागीदार’ बनाने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसी भी अन्य बीमारी से अधिकक्षय रोग को पूरी तरह से मिटाने के लिए सामुदायिक जुड़ाव महत्वपूर्ण है। क्षय रोग के प्रभाव को समाज के कमजोर वर्गों पर असमान रूप से महसूस किए जाने पर चर्चा करते हुए, उन्होंने क्षय रोग उन्मूलन के लिए संसाधनों और बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेपों को व्यापक स्तर पर जुटाने का आह्वान किया। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि क्षय रोग उन्मूलन पर सरकार की गंभीरता इसी बात से स्पष्ट है कि यह इस वर्ष में क्षय रोग से संबंधित दूसरा सम्मेलन हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस सम्मेलन में न सिर्फ सांसद बल्कि अन्य जन प्रतिनिधि, क्षय रोग उन्मूलन के लिए कार्य करने वाले संगठन, क्षय रोग से स्वस्थ्य हुईं महिलाऐं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताऐं शामिल हैं।

उपराष्ट्रपति ने क्षय रोग से स्वस्थ्य हुई महिलाओं के साहस की सराहना की, जिनमें से कुछ ने अपने अनुभव भी बताए। श्री नायडू ने कहा कि इस बात पर गौर करते हुए कि यह बीमारी महिलाओं पर अत्यधिक प्रभाव डाल सकती है, क्षय रोग के प्रति लैंगिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अपने स्वास्थ्य, कल्याण और पोषण के प्रति अपर्याप्त प्राथमिकता के कारण ही इस रोग के प्रति महिलाओं की अत्यधिक अति-संवेदनशीलता रहती है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यदि महिला में क्षय रोग मिलता है तो उन्हें परित्याग और हिंसा जैसे कष्टों तक का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसमें आश्चर्य नहीं है कि महिलाओं में क्षय रोग के मामले बड़ी संख्या में रिपोर्ट ही नहीं किए जाते और इसलिए उनका इलाज न हो पाने के मामले भी सामने आते हैं।

उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से इस रोग के बारे में बेहतर और उचित परामर्श, निरंतर जारी रहने वाली पोषण योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से बेहतर पोषण सहायता और क्षय रोग से पीड़ित बच्चों, गर्भवती और प्रसवोत्तर महिलाओं पर विशेष ध्यान देने जैसे उपायों से इसका मुकाबला करने का आह्वान किया। उन्होंने राज्यों से डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग करने के लिए सक्रिय कदम उठाने का आग्रह किया, विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए जो स्वयं स्वास्थ्य प्रणालियों से संपर्क करने को तैयार नहीं हैं। 2025 तक पूर्ण उन्मूलन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने सरकार के सभी स्तरों पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।श्री नायडू ने लोगों की पोषण स्थिति में सुधार, बेहतर संपर्क जांच, जेब खर्च को कम करने, सबसे कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षा नेटवर्क बनाने और पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में क्षय रोग का शीघ्र पता लगाने का भी आह्वान किया।

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उपराष्ट्रपति ने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों- सांसदों, विधायकों और ग्राम प्रधानों से भी आग्रह किया कि वे जिला और उप-जिला स्तर पर नियमित समीक्षा करें। उन्होंने जन-प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे जनसंवाद में सक्रिय भूमिका निभाते हुए क्षय रोग के खिलाफ लड़ाई में जन जागरूकता अभियान में उत्प्रेरक बनें। उन्होंने सुझाव दिया कि क्षय रोग से निपटने से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से इस रोग के बारे में लोगों में फेफड़ों के स्वास्थ्य प्रति जागरूकता अपनाने का संदेश फैलाना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने महिला और बाल विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के इस दिशा में एक साथ आने और महिलाओं पर क्षय रोग के प्रभाव को कम करने के लिए नई रणनीति विकसित करने के तरीकों पर गंभीर चर्चा प्रारंभ करने के प्रयासों की सराहना की।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री, श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने कहा कि भारत में क्षय रोग के कुल मामलों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 36 फीसदी है। महिलाओं में क्षय रोग को अक्सर नज़रअंदाज किया जाता है क्योंकि महिलाएं सामाजिक कलंक और जागरूकता की कमी के कारण चिकित्सा देखभाल लेने के लिए आगे नहीं आती हैं। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त, कुपोषण और लैंगिक असमानता भी महिलाओं को क्षय रोग के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है। श्रीमती ईरानी ने कहा कि 2020 में, 6,90,000 महिलाओं को क्षय रोग था और इससे निपटने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्रीय क्षय रोग कार्यक्रम को मजबूत बनाने और लिंग अनुकूल अवसंरचनातैयार करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि क्षय रोग एक ऐसी बीमारी है जिसे ठीक किया जा सकता है लेकिन इसके साथ एक सामाजिक कलंक भी जुड़ा हुआ है जिसे दूर किया जाना चाहिए ताकि लोग,खासकर महिलाऐं, इसके उचित इलाज और स्वास्थ्य देखभाल से दूर न हों। उन्होंने कहा कि क्षय रोग से पीड़ित महिलाएं न केवल इस बीमारी से जूझती हैं, बल्कि सामाजिक और वित्तीय तनाव के कारण भी उनके इलाज पर इसका असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जागरूकता फैलाने और क्षय रोग के बारे में भ्रांतियों को दूर करने का हमारा प्रयास है।

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केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि भारत की आजादी के बाद से किसी भी सरकार ने महिलाओं, उनके अधिकारों और सशक्तिकरण के बारे में इतना प्रयास नहीं किया जितना कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार ने इस ओर ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि लोग इस गलतफहमी के साथ जी रहे हैं कि महिलाएं ही महिलाओं की समस्याओं का समाधान तलाशेंगी लेकिन आज यहां सभी एक साथ एकत्रित होकर इस खतरे को समाप्त करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। श्रीमती ईरानी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2025 तक क्षय रोग उन्मूलन का संकल्प लिया है, जो अकेले सरकार द्वारा नहीं किया जा सकता है और इसके लिए सांसदों, महिला समूहों, आंगनवाड़ियों से व्यापक स्तर  पर सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता है और वास्तव में इस संकल्प को पूरा करने के लिए पूरे देश को एक जन-आंदोलन के रुप में एक साथ आना चाहिए। अपने संबोधन के समापन के साथ, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने इस समस्या के समाधान के लिए महिलाओं पर विशेष रूप से केन्द्रित रहने के लिए सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि जब हम आजादी के अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में आजादी के 75 वर्ष का उत्सव मनाते हैं, तो इस खतरे को हराने के लिए सबका साथ, सबका विकास और सबके प्रयास की भी आवश्यकता है। श्रीमती ईरानी ने राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने वाले सांसदों को धन्यवाद दिया और क्षय रोग से स्वस्थ्य हुए व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेते हुए अपनी कहानियों को भी साझा किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि क्षय रोग का खात्मा’टीबी हारेगा देश जीतेगा’केइस संकल्प और विश्वास से ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर केवल संकल्प ही हमें सिद्धि तक ले जा सकता है। श्री मंडाविया ने कहा कि हम क्षय रोग पर तभी विजय प्राप्त कर सकते हैं जब इस लड़ाई में सभी एक साथ आएं क्योंकि इसके लिए केवल केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों की नहीं बल्कि सामुदायिक भागीदारी के साथ एक जन आंदोलन की आवश्यकता है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सतत विकास लक्ष्यों (2030) से पहले 2025 तक क्षय रोग के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है और इस संबंध में बहुत से प्रयास किए जा रहे हैं जिसमें रोगी के लिए उचित पोषण सुनिश्चित करना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि 2025 तक भारत को क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए हाल ही में एक प्रारूप तैयार करने के लिए तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई थी। श्री मंडाविया ने इस संबंध में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा किए गए प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि श्रीमती ईरानी इस तरह के एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के लिए सभी हितधारकों को एक साथ लाने की दिशा में महत्वपूर्ण रूप से कार्य कर रही हैं।

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास सचिव, श्री इंदेवर पाण्डेय एवं स्वास्थ्य सचिव, श्री राजेश भूषण भी उपस्थित थे।