नदी दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री कार्यालय के आह्वान के बाद लगभग सभी राज्यों में नदियों के पास नदी उत्सव का आयोजन किया जा रहा है: श्री शेखावत

गंगा मशाल के लिए आज केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में फ्लैग इन सेरिमनी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उनके साथ जल शक्ति राज्य मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल, जल शक्ति राज्य मंत्री श्री बिश्वेश्वर टुडू, जल शक्ति मंत्रालय में सचिव श्री पंकज कुमार, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक श्री राजीव रंजन मिश्रा और टेरीटोरियल आर्मी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल प्रीतमोहिंदर सिंह भी उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जल शक्ति श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, “आज यहां एक यात्रा समाप्त हो रही है और नदी उत्सव का आरंभ हो रहा है। नदी दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान के बाद लगभग सभी राज्यों में नदियों के पास नदी उत्सव का आयोजन किया जा रहा है”। उन्होंने कहा कि भारत में नदियों के प्रति श्रद्धा और आस्था की परंपरा रही है। इसलिए आने वाले दिनों में यह पर्व आम जन मानस में नदियों के प्रति सम्मान की इस परंपरा को पुनर्जीवित करने के बीज बोएगा और हमारी नदियों के संरक्षण के लिए जन-जन को प्रोत्साहित करेगा।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री नरेन्द्र मोदी ने मां गंगा की अविरलता और निर्मलता सुनिश्चित करने की पहल ऐसे समय में की थी, जब लोगों को यह लगता था कि यह एक असंभव कार्य होगा, लेकिन उनकी दूरदर्शिता के कारण यह चुनौतीपूर्ण कार्य अब संभव होता जा रहा है। गंगा मशाल यात्रा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमने इस यात्रा के माध्यम से गंगा को संरक्षित करने के विषय को एक जन आंदोलन बनाया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे अभियान में आम जन-मानस के व्यवहार में बदलाव लाने पर जोर दिया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए हम मां गंगा की शुद्धता और अविरलता सुनिश्चित कर सकें। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा चलाए जा रहे इस कार्यक्रम में कई संगठन और संस्थान शामिल हैं, जो नदी की स्वच्छता से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इस साल हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और हम आने वाले 25 वर्षों का रोडमैप तैयार कर रहे हैं। हम इन आने वाले 25 वर्षों में देश को किस रूप में देखना चाहते हैं, यह हम पर निर्भर करता है। आज पानी की चुनौतियों से निपटना एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए इस दिशा में जल संसाधन से जुड़े इस अभियान से लोगों की भावनाओं को जोड़ने का काम किया गया है। चूँकि हमारे पुराणों में अग्नि को पवित्र माना गया है इसलिए इस मशाल की अग्नि को साक्षी मानकर लोग सच्चे मन से इस विषय से जुड़े हैं।

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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा ने अपने संबोधन की शुरुआत गंगा मशाल यात्रा को सफल बनाने के लिए सभी को धन्यवाद देते हुए की। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप नमामि गंगे मिशन के जरिए हम लोगों को गंगा के संरक्षण और संवर्धन के अभियान से जोड़ने में सफल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि आज लोग पूरी ऊर्जा के साथ आगे आकर इस दिशा में अपना योगदान दे रहे हैं। इसी का नतीजा है कि आज हमें गंगा मां के स्वच्छ और निर्बाध स्वरूप के दर्शन मिलने लगे हैं। जनभागीदारी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमने देश भर के लोगों को नमामि गंगे मिशन से जोड़ने और उनमें जागरूकता लाने के लिए वर्ष 2018 में ‘मिशन गंगा-राफ्टिंग अभियान’ शुरू किया था और उसके बाद ‘गंगा आमंत्रण’ अभियान शुरू हुआ जिसके हमें बहुत सकारात्मक परिणाम मिले हैं। इसके अलावा, हमने ‘गंगा क्वेस्ट’ क्विज जैसी पहलों के माध्यम से युवाओं और छात्रों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया है। गंगा मशाल यात्रा लोगों को इस संरक्षण पहल से जोड़ने और उन्हें जागरूक करने के लिए भी थी, जो बहुत सफल रही है। उत्तराखंड से बंगाल तक गंगा मशाल की इस पूरी यात्रा को भारी जन समर्थन मिला है।

उन्होंने आगे कहा कि आज विजय दिवस है, जो नदी उत्सव की शुरुआत का भी प्रतीक बन रहा है। नदी उत्सव आज से 23 दिसंबर 2021 तक पूरे देश में मनाया जाएगा। देश भर के लगभग सभी राज्य पूरे देश में नदियों के संरक्षण और सम्मान के लिए नदी उत्सव का आयोजन कर रहे हैं। इस उत्सव में प्रमुख नदियों के रूप में शामिल हैं- गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु, महानदी, कावेरी, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, साबरमती और सरयू। यह समारोह आजादी का अमृत महोत्सव के लिए चल रहे विभिन्न अभियानों का एक हिस्सा है, जो भारत की आजादी के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

गंगा टास्क फोर्स के कर्नल वैद्य ने कहा कि गंगा मशाल यात्रा को केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने 3 नवंबर को गंगा उत्सव के अवसर पर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। कर्नल वैद्य ने यह भी कहा कि गंगा मशाल से पहले एक दल इसकी अगुवाई करने और इस अभियान में बारे में जन मानस में जागरूकता लाने के लिए आगे-आगे चलता था ताकि लोगों को इसके महत्व के बारे में बताया जा सके और वे गंगा मशाल के समक्ष इस अभियान में शामिल होने का सच्चे मन से संकल्प ले सकें। उन्होंने कहा कि गंगा मशाल यात्रा का सभी ने स्वागत और समर्थन किया।

इस कार्यक्रम के दौरान गंगा मशाल यात्रा का एक अद्भुत प्रेरणादायक वीडियो भी जारी किया गया। जिसमें मशाल यात्रा की शुरुआत से लेकर अंत तक लोगों को जागरूक करने, उन्हें इस मिशन से जोड़ने और गंगा नदी के संरक्षण और नदी को पुनर्जीवित करने के कार्यक्रम का हिस्सा बनाने के पूरे अभियान को प्रदर्शित किया गया है।

यह मशाल एक प्रतीकात्मक लौ है जो गंगा नदी को फिर से जीवंत करने के लिए इस देश के लोगों की सामूहिक भावनाओं और विश्वास का प्रतिनिधित्व करती है। नदी के कायाकल्प की प्रक्रिया में जन भागीदारी को प्रोत्साहित करने और जन-मानस के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए मशाल यात्रा ने पूर्व निर्धारित 25 स्थानों से होते हुए कुल 2200 किमी की दूरी तय की। जिन शहरों होकर यह यात्रा अपने गंतव्य तक गई उनमें ऋषिकेश, हरिद्वार, बिजनौर, नरौरा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, कानपुर, फतेहपुर, नवाबगंज, प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, गाजीपुर, बक्सर, पटना, मुंगेर, भागलपुर, साहिबगंज, पाकुड़, फरक्का, मायापुर, बैरकपुर, फोर्ट विलियम्स-कोलकाता और बाखली बीच शामिल हैं।

मशाल का नेतृत्व गंगा टास्क फोर्स द्वारा किया गया था, जिसमें एनएमसीजी, एसपीएमजी, जिला प्रशासन, राज्यों और केंद्रीय विभागों और एजेंसियों का सक्रिय सहयोग रहा। एनवाईकेएस, गंगा प्रहरी, राष्ट्रीय कैडेट कोर, राष्ट्रीय सेवा योजना आदि जैसे स्वयंसेवी समूहों के साथ-साथ भारतीय वन्यजीव संस्थान, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम जैसे भागीदार संस्थानों ने भी इसमें हिस्सा लिया। मशाल जिस भी स्थान पर पहुंची, स्थानीय लोगों ने उसका बड़े उत्साह और भागीदारी के साथ स्वागत किया। स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटक, गंगा आरती, वनीकरण आदि विभिन्न गतिविधियों का भी आयोजन किया गया।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने 1 से 3 दिसंबर 2021 तक ‘गंगा उत्सव: एक नदी’ महोत्सव 2021 का आयोजन किया था, जिसका उद्देश्य न सिर्फ गंगा नदी बल्कि देश की सभी नदियों का उत्सव मनाया जाना था। यह नई दिल्ली में हाइब्रिड मोड में और गंगा के किनारे और उससे आसपास के जिलों में आयोजित किया गया था। उत्सव को बड़े पैमाने पर और सकारात्मक रूप से जन समर्थन मिला और देश भर से ही नहीं बल्कि देश से बाहर के लोग भी हमारे विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से इसमें शामिल हुए। डेढ़ महीने के दौरान देश के 150 से अधिक जिलों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसी तरह के नदी उत्सवों का आयोजन भागलपुर (बिहार) से लेकर हरिद्वार (उत्तराखंड), रीवा (मध्य प्रदेश) और लेह तथा कारगिल के सुदूर इलाकों सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भी किया गया।