नये साल में पितृपूजन से पूर्ण होगी सर्वमनोकामना

2 जनवरी को सुबह 7:14 मिनट से शाम 4:23 मिनट तक रहेगा सर्वार्थसिद्धि योग
उज्जैन:
इन दिनो पौष का महीना चल रहा है और पौष का पूरा महीना ही पूर्वजों को समर्पित माना जाता है। इस कारण इस माह को छोटा पितृ पक्ष भी कहा जाता है। ऐसे में पौष के महीने में पडऩे वाली अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। इसके अलावा इस बार की अमावस्या पर सुबह 7 बजकर 14 मिनट से शाम 04 बजकर 23 मिनट तक सर्वार्थसिद्धि योग है। इस विशेष योग में श्रद्धापूर्वक किया गया कोई भी काम पूरी तरह से सफल होगा।
मॉ अन्नपूर्णा ज्योतिष केन्द्र के ज्योतिषाचार्य पं. सतीश नागर के अनुसार पौष के महीने की अमावस्या तिथि 2 जनवरी 2022 दिन रविवार को पड़ेगी। हिंदू पंचांग के हिसाब से हर महीने के 30 दिन को चन्द्रमा के मुताबिक 15-15 दिनों के दो पक्ष मे बांटा गया है। एक कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष। कृष्ण पक्ष के 15वें दिन अमावस्या होती है, और हर माह की अमावस्या की तिथि को पूर्वजों को समर्पित माना जाता है। पं. नागर ने बताया की अमावस्या के दिन एक लोटे में जल लें और इसमे लाल फूल और काले तिल डालें। इसके बाद अपने पितरों की शांति की प्रार्थना करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद पीपल को जल अर्पित करें पीपल के पेड़ पर सफेद रंग की मिठाई चढ़ाएं और 108 बार परिक्रमा करें। इसके अलावा किसी जरूरतमंद को तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, कंबल और वस्त्र आदि सामर्थ्य के अनुसार दान करें। पितरों की शांति के लिए गीता के सातवें अध्याय का पाठ करें। पितरों के निमित्त ये सभी काम सुबह 11:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक कर लें। इससे आपके पितर तृप्त होंगे और आपके परिवार में पितृदोष का प्रभाव भी समाप्त हो जाएगा। परिवार में प्रेम बनाए रखने के लिए, आपसी गलतफहमियां दूर करने के लिए अमावस्या के दिन पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे आपके परिवार में आपसी प्रेम बना रहेगा। करियर में बाधा आ रही हो तो अमावस्या की रात को 5 लाल फूल और 5 दीये जलाकर अपनी कामना बोलते हुए बहती नदी में प्रवाहित कर दें। जीवन में आने वाली बाधाओं और परेशानियों को दूर करने के लिए काले कुत्ते को रात के समय सरसों का तेल लगाकर रोटी खिलाएं। इससे आपकी समस्याएं कुछ ही समय में दूर होने लगेंगी।