कलाकार ने प्रस्तुत की कविता सतपुड़ा के घने जंगल, ऊंघते अनमने जंगल

भोपाल हाट में इन दिनों नेशनल हैंडलूम एक्सपो का आयोजन
भोपाल, 2 जनवरी।
मध्यप्रदेश शिल्प हथकरघा विकास निगम का आयोजन नेशनल हैंडलूम एक्स्पो की शुरुआत 26 दिसंबर से हो गई है। ये एक्स्पो 9 जनवरी तक जारी रहेगा। एक्स्पो का आयोजन भोपाल हाट अरेरा हिल्स भोपाल मे किया गया है। इस एक्स्पो से मप्र सरकार का प्रयास यह है कि दूसरे राज्यों से आए हुए कारीगर को अपनी कला दिखाने का अच्छा अवसर मिले।
इससे भोपालवासियों को कश्मीर से लेकर आंध्रप्रदेश तक की कपड़ों की कारीगरी खरीदने का अवसर मिले। इस एक्स्पो में 11 राज्यों से करीब 100 कारीगर/कलाकार आए हैं। लेकिन कोविड प्रोटोकाल और सभी प्रिकॉशन लिए जा रहे हैं। एक्स्पो स्थल में सोशल डिस्टेंसिंग, टेम्प्रेचर जांच का ध्यान रखा जा रहा है। वैसे तो इस मेले में सभी कारीगरों की खास कारीगरी मिलेगी लेकिन रायपुर छत्तीसगढ़ से आए सुमित कुमार मेहर कोसा की साड़ी और नेहरू जैकेट लेकर आए हैं। सुमित खुद अपने हाथों से इन जैकेट और साडिय़ों को बनाते हैं। ये काम वो बचपन से कर रहे हैं वही अपने परिवार की 5वी पीढ़ी हैं। उन्हे कोसा की एक साड़ी को बनाने में 5–7 लगते हैं। हां अगर कुछ स्पेशल एंब्रॉयडरी करनी है तो कम से कम 15 से 20 दिन का समय लगता है। वहीं पश्चिम बंगाल की उत्तर ग्वालपाड़ा वीविंग सोसाइटी से आई शिप्रा घोष और उनकी बहन जौली नंदी इस बार नेशनल एक्सपो में काथा और सिल्क की साडिय़ां लेकर आई हैं।
उनका कहना है जब से एक्स्पो शुरू हुआ है तो हमारे पास जो ग्राहक आते हैं उन्हें काथा साडिय़ां एक बार में ही पसंद आ जाती हैं। शिप्रा ने बताया की काथा की एक साड़ी बनाने में कम से कम 6 महीना लगता है। अगर काम छोटा है मतलब सिर्फ पल्लू में है तो उसमें तकरीबन 3 महीने लगते हैं। क्योंकि इसका काम बहुत बारीक होता है और बंगाल की ट्रेडीशन को ध्यान रखते हुए बनाते हैं। शिप्रा और उनकी बहन जोली को का था के इस काम के लिए नेशनल और स्टेट अवार्ड भी मिल चुके हैं। एक्सपो में प्रतिदिन सांस्कृतिक प्रस्तुति आयोजित होती हैं।

जिसके तहत आज साया बैंड की प्रस्तुति गायक विकास सिरमोलिया के निर्देशन में हुई। कलाकारों ने भवानी प्रसाद मिश्र की सतपुड़ा के घने जंगल एवं अन्य कई कवियों की पंक्तियों की सांगीतिक प्रस्तुति दी। इसके बाद दूसरी प्रस्तुति सूफी संगीत और कबीर दास की रचनाओं पर आधारित रही।