बेरोजगारी की चिंता और कोविड का असर रोज दुबले हो रहे हैं एक नौकरशाह…

मध्यप्रदेश के एक युवा नौकरशाह अपने सेवाकाल की हर स्थिति को बेहद संजीदा होकर ही जीते हैं। उपरोक्त नौकरशाह को तो नौकरशाह शब्द से भी चिढ़ है, वे कहते हैं हम जनता के सेवक हैं। सरकार की नौकरी करते हैं। नौकरशाह शब्द का उपयोग उन्हें पसंद नहीं है। बता दें उपरोक्त युवा नौकरशाह को आपने कभी तबादलों से विचलित होते नहीं देखा होगा, जैसा कभी-कभी कुछ लोगों के साथ ‘सीरियसली’ होता है। बता दें ये साहब कोविड पोजिटिव रहते हुए मध्यप्रदेश के 6 लाख बेरोजगारों के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में ऐसी स्किल डेवलपमेंट की योजनाएं बना डाली है, जो आने वाले समय में मध्यप्रदेश के लिए मील का पत्थर भी बनेगा। उनकी इसी अवधारणा की एक झलक गत 12 जनवरी को भोपाल में ‘मिन्टो हाल’ कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में देखने को भी मिली, जो आया वहां पर वह गदगद होकर गया, परिणामों का इंतजार कीजिए चौकिए मत। उल्लेखनीय है उपरोक्त वाक्या युवा आय.ए.एस. अधिकारी पी. नरहरि को लेकर ही लिखा गया है…। -खबरची