गुरु गोविंद सिंह और शिवाजी के जीवन संघर्ष से लें प्रेरणा: कानिटकर

निज संवाददाता
बुरहानपुर, 20 फरवरी। भारत मां आज ऐसे विशिष्ठ योग से गुजर रही है जब विश्व को विश्वास है कि ऐशिया के दो राष्ट्रों में से कोई विश्व को नेतृत्व दे सकता है और इन दो राष्ट्रों में से भारत ऐसा राष्ट्र है जिसकी नीतियां कल्याणकारी और संपूर्ण जगत के लिए सर्वमान्य भी हो सकती है।
जिस प्रकार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका विश्व पटल पर तेजी से अग्रणी होकर चमका आज वहीं परिस्थितियां भारत के पक्ष में निर्मित हो चुकी है। आवश्यकता है हर भारतीय को स्वयं जागृत होने की एवं अपने कर्तव्य बौध के साथ मां भारती को विश्व गुरू बनाने में अपनी-अपनी भूमिका के निर्वहन की। गुरूगोविंद सिंह एवं शिवाजी महाराज ने अपने घर, परिवार और समाज को बलिदान और त्याग की ऐसी मिशाल रखी जिससे उन्होंने हर किसान और सामान्य व्यक्ति को असामान्य त्याग सिखाया। गुरू परंपरा के वाहक ये महापुरूष देश के लिए जिएं और देश के लिए शहीद हुए। यह बात ”हिन्दवी स्वराज व खालसा से एक अखंड व समरस भारत” विषय पर भारतीय शिक्षा मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने कही। उन्होंने गुरूगोविंद सिंह की 350वीं जयंती वर्षगांठ समारोह पर देशभर में आयोजित हो रहे विभिन्न कार्यक्रम अंतर्गत बुरहानपुर के तिलक हॉल में विचार व्यक्त किए। श्री कानिटकर ने कहा कि हम सबको इस देश और मां भारती की कौशिका बनकर उत्सर्ग और बलिदान के लिए भाव जागृत करने का वक्त आ चुका है। इस अवसर पर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस ने उपस्थित नागरिकों का आव्हान किया कि, अपने बच्चों को छत्रपति शिवाजी महाराज एवं गुरू गोविंद सिंह के जीवन दर्शन तथा उनके त्याग और बलिदान के बारे में बताएं।
कार्यक्रम का शुभारंभ छत्रपति शिवाजी महाराज एवं गुरू गोविंद सिंह के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर दीपक सिंह, पुलिस अधीक्षक पंकज श्रीवास्तव, मराठी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष अरविंद खरे, राधेश्याम ज्ञानी, राजेन्द्र पवार, नगर निगमाध्यक्ष मनोज तारवाला एवं जनपद पंचायत अध्यक्ष किशोर पाटिल सहित अनेक प्रबुद्धजन, जनप्रतिनिधी एवं अधिकारी मौजूद थे।