यूक्रेन से लौटे छात्रों की पढ़ाई का खर्च उठाए सरकार : दिग्विजय

पीएम मोदी को राज्यसभा सांसद का पत्र
भोपाल, 5 मार्च।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है। भारतीय छात्र यूक्रेन से वापस लौट रहे हैं। भारत वापस लौट रहे मेडिकल छात्र अपने करियर को लेकर चिंतित हैं। फिलहाल इन छात्रों के पास पढ़ाई जारी रखने के लिए कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में छात्रों की समस्या को देखते हुए राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है। पीएम मोदी को संबोधित करते हुए कांग्रेस सांसद ने लिखा है कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के समय यूक्रेन में अध्ययनरत भारत के हजारों छात्रों का संकट दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ के हस्तक्षेप के बाद भी फिलहाल युद्ध विराम की संभावना नजर नही आ रही है। ऐसी स्थिति में यूक्रेन में फंसे मेडिकल छात्रों के सामने अपनी पढ़ाई जारी रखने पर संशय की स्थिति है। कांग्रेस नेता ने आगे लिखा है यूक्रेन में चिकित्सा शिक्षा लेने गये छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। रूस के हमलों में शैक्षणिक संस्थान भी क्षतिग्रस्त हो गये हैं। फिलहाल न तो युद्ध समाप्त होने की संभावना नजर आ रही है। यूक्रेन में चल रहा युद्ध यदि समाप्त भी हो जाता है तो वहां के मेडिकल कॉलेजों के शीघ्र प्रारंभ होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। पीएम मोदी से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में देश को सेवाएं देने के लिये तैयार हो रहे इन हजारों छात्रों के भविष्य को देखते हुए मेरी आपसे अपील है कि भारत सरकार यूक्रेन से लौटे छात्रों के लिये एक विशेष योजना बनाये और देश में चल रहे समस्त शासकीय के साथ-साथ निजी मेडिकल कॉलेजों में ऐसे छात्रों को एमबीबीएस कोर्स में दाखिला दिलवाये।
यूक्रेन पर रूस के हमले की आशंका को देखते हुए अन्य देश ने अपने लोगों को पहले ही बुला लिया था, लेकिन एक सप्ताह पहले हमारे मंत्री और प्रधान मंत्री ने कहा – किसी को आने की जरूरत नहीं, इसीलिए ऐसे हालत बने हैं। यह बात राजगढ़ में राजबाग गार्डन में आयोजित कांग्रेस की जिला बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने कही। उन्होंने यूक्रेन मामले में सरकार को पूरी तरह फैल बताया। उन्होंने कहा – रशिया-यूक्रेन पर हमला कर सकता है, इसकी आशंका पहले ही हो गई थी, जिसको लेकर बाकी सारे देशों ने अपने लोगों को वापस बुला लिया, लेकिन एक सप्ताह पहले मंत्री और हमारे प्रधानमंत्री कहते हैं कि किसी को आने की जरूरत नहीं है। सब ठीक होगा, किसी को कुछ नहीं होने वाला। उसकी वजह से आज यह सब बातें हो रही हैं। इस मामले में सरकार असफल रही है। मेरे भी क्षेत्र के कुछ लोग वहां फंसे हुए थे। मैंने उनसे चर्चा की, चर्चा करने के बाद बड़ी मुश्किल से वो लोग निकल कर आए हैं। बॉर्डर पर नहीं 900 किलोमीटर दूर सेंटर खोला गया है। केंद्रीय मंत्री वहां जाकर क्या करेंगे? और इसमें कौन सी बड़ी बात है, जो हवाई जहाज से वापस बुला लिया। मुख्य बात तो यह है कि बेचारे पैदल गए। ट्रेन से जबरदस्ती गए। गाडिय़ों से गए। मुसीबत झेलकर गए, तब आपने क्या किया? मैं समझता हूं 20 हजार स्टूडेंट थे, मुश्किल से 5 या 6 हजार स्टूडेंट आए हैं, 15 हजार स्टूडेंट वहां फंसे हुए हैं। लगभग 2 लाख हिंदुस्तानी थे, जिसमें से 20 हजार अभी आ सके हैं और लोग भारी संकट में हैं।