आचार्य प्रणाम सागर के चल रहे प्रवचन, झिरनो मंदिर में हो रहा भक्तामर पाठ

भोपाल। राजधानी के जिनालयों में धार्मिक कार्यक्रम हो रहे हैं। चौक जैन धर्म शाला में आचार्य प्रणाम सागर के प्रवचन शुरू हो गए हैं। आचार्यश्री बता रहे हैं कि हमारे देश की संस्कृति व संस्कारों को देखकर दूसरे देश भारत को विश्व गुरू मान रहे हैं। जब तक संस्कृति और संस्कार जीवित हैं, तब तक ही धर्म हमारे अंदर है। जब तक अध्यात्म की ओर दृष्टि रहती है तो साधक का चिंतन आत्मतत्व की ओर रहता है। अध्यात्म केवल जिनालय और देवालयों तक सीमित नहीं है तो हमारी सोच और दृष्टिकोण पर निर्भर है। यदि जीवन में सुख चाहते हो, खुशी चाहते हो तो दुख को भी स्वीकार करो, दुख का भी सत्कार करो। यह मानो दुख मेरी मजबूती का आधार है। जीवन का असली आनन्द लेना चाहते हो तो जीवन के प्रति अपने दृष्टिकोण को बदलते हुए अपने शिकायती भाव बंद कर दो। किसी से अपेक्षा मत रखो और दोषों का प्रतिकार करने पर ही हमारी दुर्बलताएं कम होंगी। इधर भक्ताम्बर वाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध आचार्य प्रणामसागर महाराज के सानिध्य में श्री नेमीनाथ झिरनो जिनालय में भक्ताम्बर लेखन दिव्य महानुष्ठान सुबह सात बजे से शुरू हो गया है। आचार्यश्री की प्रेरणा से निरन्तर देशभर में दिव्य भक्ताम्बर लेखन चल रहा है। आज झिरनो जिनालय परिसर में राजधानी के जैन मंदिर समितियों के अध्यक्ष एव पदाधिकारियों की विशेष बैठक आचार्यश्री के सानिध्य में होगी। जिसमें 26 मार्च को भगवान आदिनाथ का मोक्ष कल्याणक विशाल स्तर पर मनाने के संबंध में चर्चा होगी। अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन महिला परिषद पद्मावती संभाग के अधिवेशन में जैन समाज की महिलाओं ने सामाजिक समरसता के साथ सेवा कार्य करने का संकल्प लिया। शिक्षा, चिकित्सा एवं पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने की रणनीति बनाई। दिगंबर जैन समाज के प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हो रहे हैं। नेहरू नगर, चौक, लालघाटी, पिपलानी, संत हिरदाराम नगर, साकेत नगर सहित अन्य जिनालयों में अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान चल रहे हैं।