प्रकृति के साथ जीना ही, तो परमेश्वर के साथ जीना है: कैलाश खेर

PRSI के अंतर्रष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर ने बांधा समा
विशेष संवाददाता
भोपाल, 6 मार्च। पब्लिक रिलेशंस सोसायटी भोपाल के अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह में रविवार को देश के प्रख्यात सूफी गायक व पद्मश्री सम्मानित कैलाश खेर ने उदिता और अचला सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कैलाश खेर ने इस दौरान कहा कि भारत को सोने की चिडिय़ा कहा जाता था और आगे भी कहा जाता रहेगा। बीच में कुछ ऐसी स्थितियां बनीं, जिसमें बहुत सारी भ्रांतियां आयीं और लोग अलग-अलग पथ पर चलने लगे। लोग पश्चिमी संस्कृति का अनुसरण करके असामान्य जीवन जीने लगे, लेकिन वास्तविकता यह है कि जब हम प्रकृति के साथ सामान्य जीवन जीते हैं, तो परमेश्वर के साथ जीते हैं। गायक कैलाश खेर ने कहा कि आज भी हमारे यहां कथावाचन व संभाषण होते हैं। देवत्व से परिपूरित बहुत सभाएं होती हैं, लेकिन वो प्रबंधित नहीं हैं। बिखरी-बिखरी हैं। उनमें पीढय़िां आवंटित हो गयी हैं। एक पीढ़ी धर्मालय बना रही, तो दूसरी व्यापार कर रही वही तीसरी पीढ़ी सिर्फ पार्टियां ही कर रही है। खेर ने कहा कि ये असली भारत नहीं है। असली भारत वह है, जहां तीन पीढय़िों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन संस्कार एक ही हो। उन्होंने कहां की संस्कार जब से विपरीत हुए हैं, तभी से मनुष्य विकृत हो गया है। उसके जीवन में दौलत और नाम आ गया है, लेकिन सब अलग-अलग हो गये हैं, बंट गये हैं। वही विच्छेदन बिगड़े स्वास्थ्य का घटक बना, क्योंकि संस्कार पोषित जीवन सरल होता है और सरलता का अभ्यास ही आध्यात्म है।
कैलाश खेर ने इस दौरान टीवी शो ‘स्वर्ण स्वर भारत’ के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि अध्यात्म में ऐसा कुछ नहीं है कि आप सब काम छोडक़र एक जगह बैठकर परमात्मा का नाम लें। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में जिस प्रकार के अनुभव हुये हैं, उन अनुभवों के कारण एक विचार उत्पन्न हुआ। उसी की परिकल्पना है ‘स्वर्ण स्वर भारत’। कैलाश खेर ने इस दौरान खुद के द्वारा गाया गया प्रसिद्ध गीत तेरी दीवानी और सैया से समा बांध दिया। उदिता और अचला सम्मान समारोह के पहले प्रसिद्ध डायरेक्टर एवं एक्ट्रेस सुश्री आकृति सिंह, की फिल्म ‘ऐट डाउन तूफान मेल’ की स्क्रीनिंग के साथ परिचर्चा का आयोजन हुआ। इस दौरान सुश्री आकृति सिंह ने फिल्म देखने वाले दर्शकों से कहा कि ‘मैं चाहती हूं कि ये फिल्म लोगों को पैसे या किसी और चीज के बहकावे में आए बगैर अपनी कहानी कहने के लिए प्रेरित करे। ‘ऐट डाउन तूफ़ान मेल’ पैसे से नहीं बल्कि जुनून के साथ बनाई गई फिल्म है।’ सुश्री आकृति सिंह ने कहा कि आज सबके पास मोबाइल फोन है और हम सब अपने वीडियो शूट करते हैं और हर पल कोई न कोई कहानी अपने करीबियों और प्रियजनों को दिखाते हैं। आने वाले समय में फिल्ममेकिंग की शैली बदलने वाली है। उन्होंने कहा, ‘मैं चाहती हूं कि मेरी फिल्म लोगों को कला की इस बदलती शैली और नए जमाने की फिल्ममेकिंग की बारीकियों पर सवाल पूछने को मजबूर करे।’ अपने निर्देशन में बनी इस पहली फिल्म की कहानी बताते हुए सुश्री आकृति सिंह ने कहा, ‘एक महिला जो अवध की रानी होने का दावा करती है, वो 1974 में नई दिल्ली आई और अपनी संपत्ति वापस मांगने के लिए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलना चाहती थी। आकृति ने बताया, ‘ये फिल्म उस असल कहानी का एक काल्पनिक प्रस्तुतिकरण है। मैंने उस असल घटना का बीज लिया है और उसे एक काल्पनिक स्पर्श दिया है। मैंने इस कहानी का दस्तावेजीकरण करने के बजाय कुछ और बताने की कोशिश की है।’ वही एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि स्टेज पर होने या कैमरे का सामना करने की खुशी सारी मुश्किलों को पार कर जाती है। अपनी सफलता का राज बताते हुए आकृति ने कहा, ‘किसी भी क्षेत्र की विलक्षणता मुझे प्रेरित करती है। यही मुझे चलाए रखता है।’ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के किसान सम्मान समारोह पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने बंधनों को तोडक़र समाज में आगे बढऩा चाहिए। पूर्व मिस इंडिया इंटरनेशनल सुश्री आयशा एमन, ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का प्रयास हमारे घरों से ही शुरु होना चाहिए तभी महिला दिवस मनाने की सार्थकता सिद्ध हो पाएगी।
मुम्बई से गीतकार और अभिनेत्री सुश्री सुहैला कपूर ने कहा भारत में महिलाओं को उनके अधिकारों और मूल्यों को मारने वाली प्रथाओं को खत्म करना पड़ेगा पर यह भी सुखद है कि आज की महिला सभी बंधनों को तोडक़र आगे बढऩा सीखने लगी है। जबकि नवभारत टाईम्स मुम्बई की फीचर्स एंड इन्टरटेनमेंट एडिटर सुश्री रेखा खान ने कहा कि जेंडर इक्वलिटी की समस्या हमारे घरों से ही हमें सुलझाना होगी, लैंगिक समानता तभी में सुधार तभी सार्थक होगा जब यह दिखेगा। इसके लिए हमें आसपास के माहौल माहौल बनाना होगा महिलाओं साबित करने का दबाव नहीं होना चाहिए और खुलकर जीने की आजादी मिलनी चाहिए। जबकि क्रिएटिव डायरेक्टर रीना पारीक ने कहा कि महिला को महिला रहते हुए ही लड़ाई लडऩी होगी महिला खुद ही में अपने आप में वह शक्ति है जीवन में सब कुछ वह करें जिसकी वह चाह रखती है निर्णय लेने की शक्ति उन्हें प्राप्त करना होगी। मुख्य अतिथि के रुप में पहुंचे मध्य प्रदेश सरकार में किसान कल्याण और कृषि विकास मंत्री कमल पटेल ने कहा कि दुनिया में सबसे पहले महिला का सम्मान भारत में हुआ था। स्वामी विवेकानंद ने भी वैश्विक मंच में बहनों और भाइयों के रूप में जब संबोधन दिया तो लोगों को मालूम हुआ कि बहन के नाम से भी महिलाओं को संबोधित किया जा सकता है और यह गरिमापूर्ण सम्बोधन हो सकता है। प्रदेश सरकार ने भी लाडली लक्ष्मी योजना के रूप में महिला सशक्तिकरण की दिशा में अपना बेहतर योगदान दिया है। महिला और पुरुष दोनों मिलकर ही भारत को 21वीं सदी का भारत बनाएंगे और दुनिया को भारत मार्गदर्शन दे पाएगा। जबकि मुख्य अतिथि के रूप में पधारे प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहां की हिंदुस्तान में पुरातन से ही महिला सशक्तिकरण मौजूद है। हम शक्ति के रूप में दुर्गा, धन के लिए लक्ष्मी मां, विद्या के लिए सरस्वती देवी को पूजते हैं पर फिर भी आज समाज में दोहरी मानसिकता मौजूद है। समाज के सामने यही सबसे बड़ा प्रश्न है, लगातार मिलकर हमको इस अंतर को पाटना होगा। पब्लिक रिलेशंस सोसायटी भोपाल के अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह में देश के पद्मश्री सम्मानित सूफी गायक कैलाश खेर, प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में मुम्बई से गीतकार और अभिनेत्री सुश्री सुहैला कपूर, क्रिएटिव डायरेक्टर रीना पारीक, नवभारत टाईम्स मुम्बई की फीचर्स एंड इन्टरटेनमेंट एडिटर सुश्री रेखा खान, प्रसिद्ध डायरेक्टर एवं एक्ट्रेस सुश्री आकृति सिंह, पूर्व मिस इंडिया इंटरनेशनल सुश्री आयशा एमन, मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग के प्रमुख सचिव राघेन्द्र कुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार गिरिजा शंकर, रवीन्द्रनाथ टैगोर वि.वि. के चांसलर संतोष चौबे, सबधाणी कोचिंग के संचालक आनन्द सबधाणी, मिलेनियम ग्रुप के एमडी विनोद यादव, मासरोवर ग्रुप के चेयरमैन गौरव तिवारी तथा पी.आई.बी. के अतिरिक्त महानिदेशक प्रशांत पाठराबे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार वरिष्ठ पत्रकार गिरजा शंकर ने कहा कि महिलाओं के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है जिसके लिए समाज में लुप्त हो रही सांस्कृतिक चेतना को जागृत करना होगा। पब्लिक रिलेशंस सोसायटी के अध्यक्ष पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने बताया है कि प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इस व्याख्यान एवं सम्मान समारोह में ‘भविष्य के बेहतर समाज के लिये आज लैंगिक समानता आवश्यक’ विषय पर व्याखान एवं महिला पत्रकारों, जनसंपर्क अधिकारियों तथा विकास एवं विज्ञान संचार के क्षेत्र में कार्य करने वाली महिलाओं का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि एक स्थायी कल के लिए आज लैंगिक समानता जरूरी यह इस बार की अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर यूनाइटेड नेशन की थीम है। पिछले कुछ समय से दुनियाभर में लैंगिक समानता को लेकर काफी चर्चाएं हो रही हैं। लोग इस विषय पर काफी सचेत हो गए है।

इनको मिला PRSI भोपाल का अचला और उदिता सम्मान
अचला सम्मान-अतिथि

  1. सुश्री सुहैला कपूर, 2. सुश्री रेखा खान, 3. सुश्री रीना पारीक, 4. सुश्री आकृति सिंह, 5. सुश्री आयशा एमन और 1. डॉ. स्वाती जयवंत राव बूटे, 2. के. एस. शाइनी, 3. डॉ. मनीषा शर्मा, 4. प्रो. भावना पाठक, 5. डॉ. मोनिका जैन, 6. श्रुति कुशवाहा, 7. प्रार्थना मिश्रा, 8. श्रद्धा चोबे,9. स्मृति शुक्ला,10. मंजु मेहता 11. सोनल भारद्वाज,12. दिव्या सिंह,
    उदिता सम्मान-
  2. दीया चौधरी, 2. प्रशंसा गुप्ता, 3. तसनीम खान
  3. विशाखा राजुरकर राज, 5. प्रीता उपाध्याय, 6. आशा शर्मा, 7. दक्षा वेदकर, 8. मनीषा धनवानी 9. नीलम गुरवे, 10. प्रेरणा मिश्रा,11. नेहा सोनी 12. अर्चना शर्मा,13. रेणुका राठौर