कांग्रेस में बदलाव के सुर

ओबीसी-दलित और आदिवासियों पर नजर

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास
मो:-9617565371

मध्यप्रदेश में कांगेे्रस का नेतृत्व बदलाव की खबरों के बीच झूल रहा है। 70 वर्ष के ऊपर वाले दोनों पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं दिग्विजय को शीघ्र ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में संगठन की जिम्मेदारियों से नवाजा जा सकता है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण हाल ही में संपन्न हो चुके 5 राज्यों के चुनावों में कांग्रेस की बद्त्तर स्थिति को आधार बनाते हुए समझा जाता है कि कांग्रेस सुप्रीमो श्रीमति सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तीनों ने मिलकर निर्णायक कदम उठाने का मन बना लिया है। नई दिल्ली अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में हो रही हलचलों से यह बात आसानी से कही जा सकती है कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की आवश्यकता पार्टी हाईकमान एक लम्बे समय से महसूस कर रही है। बदलाव की स्थिति में दूसरी कतार के जिन नेताओं को आगे करने की कवायद शुरू कर दी गई है उनमें सबसे पहले ओबीसी के सुपर पावर कांग्रेस के बड़े नेता जीतू पटवारी, दूसरे नम्बर पर दलित समुदाय के कांग्रेस में सबसे बड़ा नाम विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति तथा आदिवासियों के बेताज बादशाह कांतिलाल भूरिया पर सोनिया गांधी की नजर पड़ गई है। बताया जाता है कि 5 राज्यों में संपन्न विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल में पंजाब कांग्रेस के हाथ से फिसलते हुए देखकर गांधी परिवार अब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक फेरबदल कर सकती है। इस लिहाज से यदि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष के पद पर नर्मदा प्रसाद प्रजापति का नम्बर लग जाये तो चौकियेगा मत। जहां तक सवाल है कांतिलाल भूरिया का उन्हें भी यह कहकर मनाया जा सकता है कि समन्वय की राजनीति से मध्यप्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए नए बदलाव के साथ काम करें। इंतजार करिये और विचार करिये कि ओबीसी तथा दलित पर कांग्रेस दांव लगाने के लिए आखिर तैयार क्यों है?