जनसंपर्क में दुर्योधन का साया इसे जरूर पढ़ा जाये…

‘‘यह कि मध्यप्रदेश के जनसंपर्क विभाग में दुर्योधन का चरित्र आ गया है और यह चरित्र लंबे समय तक कायम ना रहे ऐसा कुछ निर्णय आपको करना होगा। उदाहरण यदि हम राष्ट्रीय हिन्दी मेल का देंगे तो मांनेंगे कि हम अखबार के माध्यम से शासन से लड़ाई कर रहे है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। पूरी नौकरशाही और मीडिया जगत को पता है कि राष्ट्रीय हिन्दी मेल परिसर में कोरोना काल के दौरान जब सब वर्क फ्राम होम कर रहे थे प्रिटिंग मशीन थी ही नहीं तो प्रमुख सचिव संजय दुबे ने इनके खिलाफ प्रकाशित हुई उनकी खबर को लेकर 25 लाख से अधिक का बिजली का बिल भेजकर अवैध रूप से अखबार के प्रकाशन को बंद करने के लिए लाईन काट दी और आप को 100 प्रतिशत गलत जानकारियां दी। सरकार द्वारा बनाये गये उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने राष्ट्रीय हिन्दी मेल को सही ठहराया। नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने फोरम के आदेश का क्रियान्वयन करने को कहा तो बदमिजाज संजय दुबे हाईकोर्ट चले गये और जब घटना का जिक्र राघवेन्द्र सिंह से किया जिसे आपने जनसंपर्क आयुक्त बनाया है तो उन्होंने मुद्दे को समझने की बजाये नियमों से खिलवाड़ करते हुए प्रबंध संचालक गणेश मिश्रा के निवास पर जाकर चाय पीने को कहां। बोले सब अवैध बिल ठीक हो जाएगा चिन्ता मत करिए बस जाकर मिलिए। जब उनकी बात नहीं मानी गई तब महाशय ने जनसंपर्क में आते ही राष्ट्रीय हिन्दी मेल के विज्ञापनों को होल्ड करते हुए संविधान के व्याख्या के खिलाफ ऐसे समाचार पत्र के प्रकाशन को रोकने की कौशिश की है कि जो विशुद्ध रूप से पत्रकारों की एक मात्र संस्था है और उसे बदनाम करने के लिए इधर उधर से गलत जानकारियां भी आपके पास परोसी गई है। दुख इतना है कि आपने भी आंखे मूंद ली है। कल होली मिलन में आपने बुलाया मीडिया से संवादहीनता समाप्त करने पर अपनी सहमति जरूर दी लेकिन दुर्योधन का यह चरित्र सुधरा नहीं है यह लिखने में भी मुझे संकोच नहीं है। मुख्यमंत्री जी इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि दुर्योधन के इस चरित्र को सिर्फ आगे की चार लाइनों में समझ लिजिये ‘जब इंदौर में 2 साल पहले गुटखा और सिगरेट के व्यापारी किशोर वाधवानी के यहां आईजीएसटी का छापा पड़ा और 600 करोड़ की केन्द्र सरकार ने जीएसटी की गिकवरी निकाली और किशोर वाधवानी को जेल भेजा भले आज वो जमानत पर है, तब यही महाशय राघवेन्द्र सिंह जीएसटी मध्यप्रदेश के कमिश्नर थे, ना तो कानून इन्हें बताने की जरूरत है और ना ही कानून व्याख्या की जरूरत है कि जीएसटी में कानून क्या है, सच तो यह है कि सीजीएसटी की रिकवरी 600 करोड़ की थी तो मध्यप्रदेश सरकार का हिस्सा भी 50 प्रतिशत स्टेट जी.एस.टी. नियम के अनुसार रिकवरी सिगरेट गुटखा व्यापारी से वसूली करने की कार्रवाई करना था। मुख्यमंत्री जी राघवेन्द्र सिंह से पूछिये क्या उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार के 600 करोड़ की रिकवरी के लिए किशोर वाधवानी एण्ड कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई की यो कोई नोटिस जारी भी थी यदि ऐसा नहीं किया तो क्या राघवेन्द्र सिंह भ्रष्टाचार के संदेश के घेरे में नहीं है। मेरा विशेष संपादकीय में यह सवाल है कि 600 करोड़ के जीएसटी में वसूली की कार्रवाई को रोकने वाले किसी भी आइएएस अधिकारी को जनसंपर्क जैसे महकमें में मध्यप्रदेश की पत्रकारिता को बर्बाद करने के लिए दुर्योधन की भूमिका में यदि अनजाने में बैठा दिया गया है तो फिर इस पर विचार किया जाना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ? अंत में 2 वर्ष की कामयाबी भरा सफर आपको मुबारक हो, शुभकामनाएं….


विशेष संपादकीय के लेखक इस पत्र
समूह के प्रधान संपादक हैं।