पीएससी परीक्षा मामले में एक्सपर्ट कमेटी के अभिमत पर हस्तक्षेप से किया इनकार

जबलपुर। आदि ब्रह्म समाज की स्थापना किसने की थी। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए इस प्रश्न के दो विवादित उत्तरों को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। एकलपीठ द्वारा याचिकाएं खारिज होने के बाद युगलपीठ के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की युगलपीठ ने कहा कि इस मामले में एक्सपर्ट कमेटी के अभिमत पर हस्तक्षेप करने का अधिकार हाई कोर्ट को नहीं है। इस मत के साथ हाई कोर्ट ने अपील भी खारिज कर दी। हाईकोर्ट के इस फैसले से करीब दो सैकड़ा उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं। पूर्व में हाई कोर्ट ने इन उम्मीदवारों को अंतरिम राहत के तहत पीएससी की मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी। ये सभी उम्मीदवार दो अंकों से फेल हो गए थे। अब उम्मीदवारों का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट की शरण लेंगे। शुभांगी गंगराडे सहित अन्य ने याचिका और फिर अपील दायर कर उक्त प्रश्न के दो विवादित उत्तरों को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाओं में कहा गया कि आदि ब्रह्म समाज की स्थापना के प्रश्न के सही उत्तर ‘केशव चंद्र सेन’ व देवेन्द्रनाथ टैगोर में है विवाद की स्थिति है। याचिका में कहा गया कि मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी, एनसीईआरटी की 12वीं सहित सात प्रकाशकों की पुस्तक में केशव चंद्र सेन को सही उत्तर माना है। वहीं एक्सपर्ट कमेटी ने गजेटियर को आधार मानते हुए देवेन्द्रनाथ टैगोर को सही उत्तर बताया।