परीक्षा को उत्सव की तरह लिया जाए, मोदी ने युवा छात्रों को दिया पी-3 का मंत्र

पीएम मोदी ने विद्यार्थियों से की परीक्षा पे चर्चा में बोले
नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 01 अप्रैल को विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों से परीक्षा पे चर्चा की। विद्यार्थियों के मन से बोर्ड परीक्षा का तनाव दूर भगाने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कई सारे टिप्स साझा किए। पीएम ने अमूल्य जीवन का सामर्थ्य पहचानने की बात पर जोर देते हुए कहा कि परीक्षाओं को एक सजह प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए। परीक्षा से जिंदगी नहीं बनती है। यह सिर्फ एक पड़ाव होती हैं। परीक्षा पे चर्चा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हल्की-फुल्की और मजाकिया बातों पर सभी छात्र और शिक्षक जोर-जोर से ठहाका लगाने लगे। शिक्षा और राष्ट्रीय नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़तीं बेटियों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जल्द ही ऐसा समय भी आएगा कि महिलाओं की जगह पुरुष आरक्षण मांगने लगेंगे। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने आसान शब्दों कई सामाजिक समस्याओं को भी उठाया और नई पीढ़ी को उनके उन्मूलन के लिए अपना संदेश भी दिया।
समाज में बेटा-बेटी एक सामान होने चाहिए
प्रधानमंत्री ने लैंगिक भेदभाव को खत्म करने और समानता को बढ़ावा देने की बात करते हुए समाज में बेटा-बेटी को एक सामान मानने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये हर युग की अनिवार्यता है। स्कूल, स्पेस से लेकर सीमा तक सब जगह बेटियों ने अपनी जगह खुद बनाई है। आज खेल जगत में देश की बेटियां नाम रोशन कर रही हैं। विज्ञान के क्षेत्र में हमारी बेटियों ने पराक्रम दिखाया है। 10वीं, 12वीं के रिजल्ट की मेरिट में भी बेटियों की संख्या ज्यादा होती हैं। स्कूलों में महिला शिक्षकों की संख्या भी बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हर परिवार के लिए बेटी बहुत बड़ी शक्ति बन गई हैं। ये बदलाव बहुत अच्छा है। ये बदलाव जितना ज्यादा होगा, उतना लाभ होगा।
परिजन, शिक्षकों के पास समय नहीं, खुद को जानना जरूरी
परीक्षा पे चर्चा 2022 के दौरान प्रधानमंत्री ने आत्म विश्लेषण करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आप स्वयं के विषय पर जरूर विश्लेषण कीजिए। कामकाजी माता-पिता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब बच्चा दिन भर क्या करता है, उसके लिए मां- बाप के पास समय नहीं है। वहीं, शिक्षक को केवल सिलेबस से लेना देना है कि मेरा काम हो गया, मैंने बहुत अच्छी तरह पढ़ाया, अब बस। लेकिन बच्चे का मन कुछ और करता है। जब तक हम बच्चों की शक्ति, सीमाओं, रुचियों और उनकी अपेक्षाओं को जानने का प्रयास नहीं करते हैं, तो वे आगे नहीं बढ़ पाते हैं, क्योंकि उन्हें सपोर्ट नहीं मिल पाता। प्रधानमंत्री ने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि आप अपने मन की, अपनी अपेक्षाएं बच्चे पर न थोपें, उन पर बोझ न बढ़ाए।

प्रधानमंत्री ने कई सारे टिप्स किए साझा
पीएम मोदी ने परीक्षा पे चर्चा के दौरान स्वच्छ भारत अभियान की सफलता का जिक्र करते हुए उसका क्रेडिट बच्चों को दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छता की मेरी भावनाओं को चार चांद लगाने का काम देश के बच्चों ने किया है। इसमें आज हम जहां पहुंचे हैं, उसका सबसे ज्यादा क्रेडिट मैं बालक-बालिकाओं को देता हूं। उन्होंने कहा कि ऐसे कई बच्चे हैं, जिन्होंने कई बार अपने परिजनों को इधर-उधर कूड़ा फेंकने पर टोका है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने पी-3 का मंत्र भी दिया।

पढ़-लिख कर कई बेटियां बनीं परिवार का सहारा
प्रधानमंत्री ने सामाजिक समस्याओं का हवाला देते हुए भी देश की बेटियों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पहले मां-बाप और कुछ लोग ये भी सोचते थे कि बेटे को पढ़ाना चाहिए और बेटी को पढ़ाकर क्या करना है, वो तो ससुराल जाएगी और जिंदगी का गुजारा कर लेगी। जो समाज बेटियों के सामर्थ्य को जानने में पीछे रह गया, वह समाज कभी आगे नहीं बढ़ सकता। पीएम मोदी ने कहा कि मैंने ऐसी कई बेटियां देखी हैं, जिन्होंने मां-बाप के सुख और उनकी सेवा के लिए अपनी पूरी जिंदगी खपा दी।