नरेन्द्र मोदी की पहली पसंद बनते जा रहे है सिंधिया इसका मतलब….

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास
मो. 9617565371
मध्यप्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा कर देने वाले केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया ने भारतीय जनता पार्टी में आने के बाद अपने आप को जिस तरह केसरियामय कर लिया है, उनकी इस राजनीतिक शैली को राष्ट्रीय सेवक संघ के मुख्यालय नागपुर में स्वीकारोक्ति मिल चुकी हैं, लेकिन इससे आगे बढक़र यदि ऐसा माना जाए कि ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की पहली पसंद भी बन चुके हैं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। भारत के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने सन् 2014 में पहली बार शपथ ली थी तब से लेकर आज तक इतिहास के पन्नों को पलटने की जरूरत है और यह विश्लेषण का विषय भी हैं कि प्रधानमंत्री ने मध्यप्रदेश के किसी भी भाजपा नेता को परिवार सहित मिलने के लिए प्रधानमंत्री आवास पर आमंत्रित नहीं किया। लेकिन ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया मप्र के पहले भाजपाई नेता हैं, जिन्हें नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री निवास पर परिवार सहित मिलने के बाद खुशी जाहिर की हैं। यह बात अलग है कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर के यहां के वैवाहिक समारोह में प्रधानमंत्री सम्मिलित हुए होंगे लेकिन वह उनके भारतीय जनता पार्टी में होने का एक पारिवारिक सरोकार था, जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं हैं, परंतु ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रधानमंत्री के पसंदीदा मंत्रियों में पारिवारिक रूप से भी शुमार होने लगे हैं, इसका राजनीतिक अर्थ भी निकाले जाने की कोशिशें शुरू हो गई है। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि का अपना आंकलन, मध्यप्रदेश की राजनीति में आज नहीं तो कल भारतीय जनता पार्टी के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मध्यप्रदेश का मुखौटा घोषित कर दे तो भी कोई चौंकाने वाला वाक्या नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली में यह घोषित सच्चाई है कि यदि उन्होंने और गृह मंत्री अमित शाह ने मिलकर यह तय कर लिया है कि मध्यप्रदेश में 2023 का विधानसभा चुनाव भले ही शिवराज सिंह चौहान लड़ाये, लेकिन सामने चेहरा ज्योतिरादित्य सिंधिया का होगा तो यह दोनों बड़े नेता मतलब मोदी और शाह सिंधिया के नाम पर अड़ जाये तो चौंकियेगा मत। मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार को उखाडक़र दो साल पहले जिस तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजनीति में धूम मचा दी थी उसे आज तक कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता पचा नहीं पा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को तो अभी तक सपनों में मुख्यमंत्री की कुर्सी और ज्योतिरादित्य सिंधिया का चेहरा डराता है। रहा सवाल भारतीय जनता पार्टी की अंदरुनी राजनीति का, मध्यप्रदेश में सिंधिया के कद बढऩे का असर क्या हो रहा है…? इस सवाल के उत्तर में यह लिखा जाना गलत नहीं होगा कि मुख्यमंत्री पद के जितने भी दावेदार हैं उनका प्रधानमंत्री के सिंधिया के प्रति बढ़ते अनुराग से चिंतित होना स्वाभाविक है, लेकिन प्रधानमंत्री के सामने गृह मंत्री अमित शाह के केवल दो सवाल है जिसमें पहला सवाल है मध्यप्रदेश में 2023 का विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भाजपा की जीत के मायने क्या है और दूसरा सवाल यदि 2023 विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी को मध्यप्रदेश में जीतना है तो उनके सामने जिताऊ चेहरा कौन सा होगा। समझा जाता है कि इन दोनों सवालों के उत्तर में संभवत: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ज्योतिरादित्य माधव राव सिंधिया का नाम अपने हृदय पटल में स्थापित कर लिया है। बस औपचारिक घोषणाएं अप्रैल महीने के बाद हो जाए तो चौंकाने वाली कोई बात नहीं होगी। जहां तक सवाल है मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का तो संगठन की बैठकों में कई अवसरों पर कह चुके हैं कि यह सरकार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बनाई है। इसलिए उनके सम्मान में कभी कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। लेकिन यह बात प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को भी पच जाए, ऐसा मान लेना जरा मुश्किल है। इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में प्रवेश से लेकर आज तक का सफर सिंहावलोकन के योग्य है जिसमें कई अवसरों पर सिंधिया को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वपूर्ण बनाये रखने में कोई कसर ही नहीं छोड़ी हैं। ताजा उदाहरण तो आप उत्तर प्रदेश के जेवर विमानतल के निर्माण के अवसर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा प्रधानमंत्री का महिमामंडन और उनकी सरकार में उपलब्धियों का सिंधिया द्वारा बखान सबसे बड़ा प्रमाण हैं। इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहली पसंद सिंधिया बन चुके हैं और समय के अंतराल में मध्यप्रदेश के सभी बड़े नेताओं से यह कहा जाए कि सिंधिया के साथ रहिए और सिंधिया के साथ चलिए तो किसी को ऐतराज नहीं होगा।
विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र
समूह के प्रधान संपादक हैं।