वत्त मंत्री ईमानदार, संवेदनशील, परंतु सुनते नहीं प्रमुख सचिव …..

कड़वी खबर

विजय कुमार दास
मो:-9617565371

मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार की चौथी पारी में दूसरी बार वित्तीय बजट प्रस्तुत करने वाले दलित राजनेता जगदीश देवड़ा एक निहायत ईमानदार एवं संवेदनशील वित्त मंत्री है। लेकिन देवड़ा जी की ईमानदारी और संवेदनशीलता से वाणिज्यकर विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमति दीपाली रस्तोगी ज्यादा इत्तेफाक नहीं रखती। सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्री ने खरगौन में पदस्थ एक दिल की बीमारी से जूझ रहे आबकारी आरक्षक का झाबुआ ताबदला करने 10 बार इसलिए कहा, क्योकि वह बेचारा आरक्षक अपना इलाज गुजरात के शहीद में करवा रहा है। जो झाबुआ से नजदीक है परंतु सूत्रों का कहना है प्रमुख सचिव श्रीमति दीपाली रस्तोगी ने अवधारणा बना ली है कि आबकारी वाले सभी झाबुआ जाना चाहते है। क्योकि वहा शराब की तस्करी होती है। तो आबकारी की आघोषित आय बढ़ जाती है। जबकि उपरोक्त आरक्षक के मामले में ऐसा नहीं है। मंत्री जी के सूत्रों के अनुसार वह आरक्षक दिल की बीमारी से लंबे समय से जूझ रहा है। उसे अपने परिवार के लिए अपनी जान बचाने की चिंता है, परंतु मेडम नहीं सुनने वाली। ऐसा ही एक मामला पति-पत्नी का है। खंडवा के एक आबकारी अधिकारी की पत्नि भी शासकीय सेवा में है, विभाग में भी है परंतु दोनो को एक स्थान पर रखने या आस-पास रखने की नीति से प्रमुख सचिव सहमत नहीं है। इस बार भी किस्सा कुर्सी का संकट देश में तब गुजरता है जब कोई मंत्री, मुख्यमंत्री बननेे की होड में हो, तो उसके पर कट जाए, लेकिन यहां ऐसा भी नहीं है। जगदीश देवड़ा अन्य मुख्यमंत्री पद के दाबेदारों में भी शमिल नहीं है। जैसा कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा है फिर भी बेचारे देवड़ा की प्रमुख सचिव ना सुने आश्चर्य एवं चौकाने वाली बात है। एक मामला तो ऐसा है जिसमें आबकारी राजस्व ही दाव पर लगा हुआ है। वह है 8 जिलों में शराब दुकानों का विवादित हो जाना, परंतु क्या करें देवड़ा साहाब, दलित है। इसलिए कमजोर है ऐसा नहंी है सच तो यह ईमानदार है और संवेदनशील है जिसकी वजह से उन्हे अपने ही विभाग के प्रमुख सचिव की असहमति से निपटना एक चुनौती बन गया है।