50 हजार बेरोजगारों को झांसा देने की खबर फैलाने वाली एक महिला का दावा ‘मंत्री जी और मुख्य सचिव’ दोनों कुछ नहीं बिगाड़ सकते क्योंकि…

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी चौथी पारी में सबसे ज्यादा चिंता बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के लिए की है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। परंतु यह एक चौंकाने वाला वाक्या है कि, नियमों के विरुद्ध नियुक्ति पाने वाली एक सरकारी संस्था में पदस्थ कार्यकारी संचालक का दावा है कि वह 50 हजार लोगों की नियुक्ति करने वाली है, और तो और उक्त महिला ने एक प्रमुख समाचार पत्र में इस झांसे से संबंधित आशय का समाचार भी छपवा दिया है। उक्त महिला की अवैध नियुक्ति एवं भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, लोक आयुक्त तथा पुलिस की आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा ईओडब्ल्यू में की जा चुकी है, परंतु बताते हैं उक्त महिला के चेहरे में कोई तनाव नहीं है। सूत्रों के अनुसार जिस संस्था में वह दादागिरी से काम कर रही है अधिकांश कर्मचारी उसकी तानाशाही से त्रस्त हैं, जब जिसे चाहे वह बिना किसी से पूछे संस्था से बाहर कर देती है। सूत्र कहते हैं अभी तक रोजगार प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने वाली इस सरकारी संस्था का अब यह काम बाहरी एन.जी.ओ को या निजी कंपनी 20 प्रतिशत कमीशन लेकर बांट दिया जाता हैं,परंतु विभाग में सबको पता है और सचिव पी. नरहरि यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि ऊपर वाले कुछ नहीं करते तो उन्हें क्या करना है। इसी का फायदा उठाकर अब वह महिला जिसके ऊपर सब प्रकार की भयंकर अनियमिताओं का आरोप है। उक्त संस्था को जड़मूल से नष्ट करने पर तुली है संस्था के एक कर्मचारी ने बताया कि उक्त महिला अधिकारी के चरित्र पर भी लोगों को शक है। उसका कहना है कि चरित्र से मतलब भ्रष्टाचार के जरिए उसने अब तक करोड़ों खा लिए हैं पर विभाग यह कहकर कुछ नहीं करता कि उक्त महिला के ऊपर मंत्री जी का एवं मुख्य सचिव का समर्थन है तो क्या किया जावे। पता सबको हैं कि उक्त संस्था में इस महिला ने भ्रष्टाचार का तांड़व मचा दिया है। जब किसी पत्रकार प्रतिनिधि ने उपरोक्त विभाग के मंत्री से उक्त संस्था में घट रही भ्रष्टाचार की घटनाओं का जिक्र किया तो मंत्री जी ने दो टूक कह दिया हैं कि उक्त महिला की अवैध नियुक्ति से लेकर अकूत भ्रष्टाचार की शिकायत के दस्तावेज उनके पास पहुंच गये हैं, जिसका परिक्षण करने के बाद जांच कमेटी बना दी गई है, जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने पर उक्त महिला को बर्खास्त भी किया जा सकता है। आश्चर्य एवं चौंकाने वाली बात यह है कि हजारों बेरोजगारों को झांसे में रखने वाली महिला किसी निजी कंपनी में अधिकारी रहते हुए उक्त संस्था में बिना 15 लाख की सीटीसी के नियुक्त हो गई, भ्रष्टाचार चरम पर है, दावा कर रही है मंत्री जी और मुख्य सचिव का समर्थन है यह तथ्य मंत्री जी, मुख्य सचिव को यह सब पता नहीं चल पाया चौंकाने वाला मामला है। उल्लेखनीय है उपरोक्त वाक्या ‘सेडमेप’ के अयोग्य घोषित किये गये नियुक्ति कार्यकारी संचालक अनुराधा सिंघई से संबंधित नहीं है। परंतु जांच समिति द्वारा जांच के आदेश की पुष्टि लघु एवं सूक्ष्म उद्योग मंत्री ओमप्रकार सकलेचा ने जरूर की है। खबरची…