97.3% उपलब्धता 2.43% पारेषण क्षति

वित्तीय वर्ष में एमपी ट्रांसको 1000 किमी. की नई लाइन और 60 सब स्टेशनों के उन्नयन के लिए तैयार

ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार

खास-खबर
वर्ष 1996 के बाद से लगातार लाभ में है एमपी ट्रांसमिशन कंपनी

देश में बिजली कंपनियों की खस्ताहाल स्थिति किसी से छिपी नहीं है, ऐसे में किसी बिजली कंपनी के लगातार फायदे में होने की खबर सामने आए तो निश्चित तौर पर आश्चर्य जरूर होगा। लेकिन यह बात सत्य है कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड लगातार वर्ष 1996 से लाभ में है। वित्तीय वर्ष 2021-2022 में यह कंपनी 60 करोड़ रूपए से अधिक के फायदे में रही है। जबकि कंपनी का यह फायदा डिस्कॉम से मिलने वाले लाभ की राशि नहीं लेने के बाद हैं। अगर ट्रांसमिशन कंपनी के परफॉर्मेंस की बात करे तो फरवरी माह में कंपनी की उपलब्धता 97.3 प्रतिशत तथा 2.43 प्रतिशत पारेषण क्षति रही है। ‘राष्ट्रीय हिन्दी मेल’ के इस प्रतिनिधि को एक मुलाकात के दौरान एमपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के एमडी सुनील तिवारी ने बताया कि ऊर्जा विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23 में जो लक्ष्य दिया गया है उसके लिए ट्रांसमिशन कंपनी की पूरी टीम मुस्तैदी के साथ तैयार है। नए वित्तीय वर्ष में कंपनी द्वारा करीब 1000 किलोमीटर की नई ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी, जो 400,220,132 ईएचवी लाइन्स के साथ ही आरटीएस इलेक्ट्रिफिकेशन की लाइन होगी। इसी तरह 400,220 और 132 केवी क्षमता के 60 ट्रांसफर्मों का उन्नयन करके उनकी क्षमता बढ़ाकर लगभग 4500 एमवीए किया जायेगा। एमडी सुनील तिवारी ने बताया कि अलग-अलग स्थानों पर 132 केवी के नए सब स्टेशन इस वित्तीय वर्ष में लगाए जायेंगे। यह सभी कार्य ट्रांसमिशन कंपनी की पूरी टीम के साथ समय-सीमा में पूरा किया जायेगा, जिसके लिए सभी इंजीनियर तैयार हैं।
सबस्टेशन में चोरी होने पर कर्मचारी पर हो एफआईआर
एमपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के किसी भी सबस्टेशन में चोरी की घटना को लेकर एमडी सुनील तिवारी बेहद सख्त है। उनका मानना है कि बिना कंपनी के कर्मचारी की मिलीभगत के किसी भी सब स्टेशन में चोरी की घटना हो नहीं सकती। जिसके लिए उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को साफ निर्देश दिए है कि चोरी की घटना होने पर अपने कंपनी के कर्मचारी के खिलाफ पहले एफआईआर कराई जाये। दरअसल रतलाम और जावरा के सबस्टेशन में अर्थिंग के लिए लगे कॉपर केबल की चोरी हो गई है। जब इसकी बारीकी में जाकर एमडी ने पड़ताल की तो पता चला कि सबस्टेशन में उस दिशा में लगा कैमरा बंद है, जिसकी जानकारी चोरी करने वाले को तो नहीं सकती। अर्थात सबस्टेशन के ही किसी कर्मचारी ने जानकारी बाहर देकर चोरी की घटना को अंजाम दिया।

डिस्कॉम से नहीं लिया फायदे का 4500 करोड़
प्रदेश की एमपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी को मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा तय किए गए टैरिफ के अनुसार भुगतान डिस्कॉम करती है। जिसमें ट्रांसमिशन ने बीते 15 सालों में करीब 4500 करोड़ रूपए फायदे का नहीं लिया है। जिससे आमजनता पर टैरिफ का अतिरिक्त भार नहीं पड़ा लेकिन उसके बाद भी कंपनी लाभ में है। बताते है कि देश के 8 बड़े राज्यों के ट्रांसमिशन कंपनी के कार्यों की तुलना करने पर सबसे कम नुकसान में एमपी ट्रांसको है, जो निश्चित तौर पर बधाई के पात्र है।