सारंग ने सुनाई खरी-खरी

प्रजेंटेशन दे रहे या समय खराब कर रहे
ग्वालियर।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने मानसिक आरोग्य शाला, जयारोग्य अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मिली खामियों को लेकर जमकर फटकार लगाई। मानसिक आरोग्य शाला में सफाई व्यवस्था संभाल रही कंपनी का दो महीने का भुगतान रोकने के निर्देश दिए। वहीं जयारोग्य अस्पताल में अमृत फार्मेसी में मिली गड़बड़ी को लेकर पूरा स्टाफ बदलने के निर्देश दे डाले। यही नहीं उन्होंने अस्पताल परिसर में संचालित हो रहे मेडिकल स्टोर पर आपत्ति जताते हुए उसे तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए। इसके आद पीआइयू के कार्य का प्रजेंटेशन कमजोर होने पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने मेडिकल कालेज व पीआइयू के अफसरों पर नाराजगी जताते हुए कहा किप्रजेंटेशन दे रहे या समय खराब कर रहे हो। मंत्री को दिए जाने वाला प्रजेंटेशन इतना कमजोर होगा मैं आपत्ति दर्ज कराता हूं। कमिश्नर साहब आप इस बात को लिखिए जिससे पीआइयू के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। कमेटी बनाएं और एडीएम स्तर के अधिकारी से जांच मानीटरिंग कराएं। पीआइयू व मेडिकल कालेज के अफसरों की चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने जीआर मेडिकल कालेज में बैठक ली। जिसमें ग्वालियर सांसद विवेक शेजवलकर व बीजेपी नेता अभय चौधरी शामिल हुए। प्रजेंटेशन पीआइयू के प्रदीप अष्टपुत्रे ने दिया। 112 करोड़ में तैयार हुए अकादमिक भवन का कार्य पूर्ण होना बताया। इस पर पूर्व डीन डा एसएन अयंगर ने मंत्री के कहने पर उसमें तमाम खामियां बता दीं। इसके बाद हजार बिस्तर अस्पताल का पैसा पूरा खर्च बताया गया और बचे हुए कार्य के लिए 100 करोड़ रुपये अलग से मांगे। इसी तरह से बर्न यूनिट बनकर तैयार और पैसा पूरा खर्च हो चुका पर उसमें लिफ्ट व एसी का काम अधूरा छोड़ दिया। इन सब खामियों को लेकर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कमिश्नर को आदेश दिया किपीआइयू, मेडिकल कालेज के अफसरों की एक कमेटी बनाएं जिसकी मानिटङ्क्षरग एडीएम स्तर का अधिकारी करेग। सभी भवन की जांच व यथा स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
डाक्टर साहब, जहां मरीज रखे वहां आप कितने मिनट रह सकते: मानसिक आरोग्य शाला में पुरुष वार्ड का चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने भ्रमण किया। वहां पर बदबू और गंदगी देख कर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा किडाक्टर साहब आप लोग यहां पर कितने मिनट रह सकते हो। शायद एक मिनट भी नहीं और इस हालत में मरीज रखे हैं वह भी तब जब मंत्री का भ्रमण है। अन्य समय पर क्या हालात रहते होंगे यहां। जिस कंपनी के पास सफाई की जिम्मेदारी उसका दो महीने का भुगतान रोका जाए। महिला व पुरुष मरीज के लिए अलग-अलग शौचालय बनाएं जाएं, खाने की गुणवत्ता सुधारें।