2 घंटे की मेहनत में कलेक्टर ने दिलाया जबलपुर में 8000 लोगों को रोजगार

विजय कुमार दास ( मो. 9617565371 )
विशेष रिपोर्ट जबलपुर से फोटो जर्नलिस्ट कमलेश शर्मा के साथ

बंद पड़े गारमेंट क्लस्टर को पुर्नजीवित करने के लिए उद्योग विभाग ने जान लगा दी और रोज 2 घंटे की मेहनत में कलेक्टर ने दिलाया जबलपुर में 8000 लोगों को रोजगार

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विषम परिस्थितियों के चलते, मतलब आर्थिक तंगी के दौर में भी जिस तरह बेरोजगारों को रोजगार दिलाने की प्रतिबद्धता के साथ सभी बड़े जिलों में या यूं कहा जाये मेट्रो की श क्ल में परिवर्तित होने वाले शहरों में डिलेवरी सिस्टम को और गुड गर्वेनेंस को प्रभावशाली बनाने चाहते है, उनका यह प्रयास निश्चित रूप से बेरोजगारों के अंधेर होते भविष्य में उजाले की एक किरण के रूप में कारगर साबित होने लगा है। इसका जीता-जागता उदाहरण है, जबलपुर शहर और जबलपुर जिला जहां पर बेरोजगारों की संख्या डेढ़ लाख से भी अधिक है। इसी शहर में यदि 8000 लोगों को परोक्ष अथवा अपरोक्ष रूप से रोजगार मिलने लगे तो इस चमत्कार को आप क्या कहेंगे। इस सवाल का उत्तर खोजने में राष्ट्रीय हिन्दी मेल की टीम ने जबलपुर शहर के बीचो-बीच केन्द्र सरकार की सहायता से निर्मित हुए गारमेंट क्लस्टर का दौरा किया। आप यह जानकर चौंक जायेंगे कि जबलपुर का यह गारमेंट क्लस्टर कोविड-19 के महामारी के दौर में पूरी तरह बंद होने की स्थिति में पहुंच गया था। इस गारमेंट क्लस्टर में 200 गारमेंट से क्टर की इकाईयां सदस्य है, जिन्हें सपने में भी यह उ्मीद नहीं थी कि इस गारमेंट क्लस्टर का अभी भी कोई भविष्य बाकी है। लेकिन जब यह मुद्दा फरवरी 2022 में अर्थात् मात्र 4 महीनें पहले जिला कलेक्टर के रूप में ज्वाइन करने वाले युवा आईएएस अधिकारी टी इलैया राजा के संज्ञान में आया, तो उन्होंने उसी दिन से प्रतिदिन 2 घंटे का समय निकालकर जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक विनीत रजक के साथ पूरी टीम को चार्ज कर दिया और यह टास्क देते हुए काम पर लगा दिया कि हर हाल में गारमेंट क्लस्टर की 200 इकाईयां प्रारंभ हो जानी चाहिए। राष्ट्रीय हिन्दी मेल टीम को गारमेंट क्लस्टर के प्रबंध संचालक दीपक जैन तथा परिधान इकाई के आलोक जैन ने बताया कि कलेक्टर के प्रतिदिन 2 घंटे की मेहनत ने हमारी 200 इकाईयों को प्रारंभ ही नहीं किया, बल्कि यहां बनने वाले ड्रेस मटेरियल एवं बच्चों से लेकर सभी वर्ग के लोगों के रेडीमेट गारमेंट की मार्केटिंग के भी रास्ते मजबूत कर दिये है। दीपक जैन ने बताया कि सभी इकाईयां सुचारू रूप से प्रारंभ हो गई है और इन इकाईयों से जुड़े स्वसहायता समूहोंं ने तो कोरोना काल में भी 2-2 रूपये के मास्क बनाकर पूरे जिले में सुरक्षा कवच का आंदोलन भी खड़ा कर दिया था। यूनिफार्म बनाने वाले आलोक जैन ने बताया कि हमारी गारमेंट क्लस्टर की 200 इकाईयों में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला हुआ है। दीपक जैन यह कहते हुये नहीं थकते कि यदि कलेक्टर जबलपुर का बेरोजगारों के प्रति और उद्योगों के सर्वधन के प्रति ऐसा ही सकारात्मक प्रतिबद्धता के साथ गुड गर्वनेंस रहा तो वह दिन दूर नहीं जब जबलपुर जिले में रोजगार के अवसरों की तलाश में कोई भटकता नजर नहीं आयेगा।