मालवा के रतलाम को इंतजार, शिवराज सरकार देख लें एक बार…

कड़वी खबर: विजय कुमार दास (मो.9617565371)
मध्यप्रदेश की तेज गति से व्यवसायिक गतिविधियों का केन्द्र बनने वाले रतलाम जिले को लेकर मालवा में बेहद उत्साहजनक वातावरण है। दिल्ली-मुंबई आठ लाईन वाली डीएम कॉरीडोर के आने के बाद रतलाम मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब बनने जा रहा है।मध्यप्रदेश औद्योयोगिक विकास निगम द्वारा रतलाम में डीएम कॉरीडोर की चतुर्भुज सीमाओं पर लगभग 6,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है, जिसमें कम से कम छोटे बड़े मिलाकर एक हजार से अधिक औद्योगिक इकाईयों की स्थापना होने की संभावना है और तो और कुशल एवं अकुशल कारीगर, तथा पढ़े लिखे 50,000 से अधिक बेरोजगारों को इस डीएम कॉरीडोर में रोजगार मिलने की भी संभावना है।लेकिन सच यह हैकि यदि मुख्यमंत्रि शिवराज सिंह चौहान ने और मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस ने नियमित रूप से रतलाम जिले में समस्याओं से जूझते हुए प्रशासन कि तरफ नजर इनायत कर ली तो निश्चित मानिये कि रतलाम जिले के विकास के साथ-साथ पूरे मालवा में विकास की गतिविधियों को लेकर मध्यप्रदेश का एक बड़ा केन्द्र स्थापित हो जायेगा, लेकिन शर्त है मुुख्यमंत्री और मुख्य सचिव समय निकाल पायें और रतलाम जिले की प्रस्तावित योजनाओं बिना समय जाया किए स्वीकृति प्रदान करते रहें। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि ने पिछले 2 दिनों में रतलाम का जीरो ग्राउंडदौरा करने के बाद यह पाया है कि शिवराज सरकार सभी चुनावों को जीत तो जाती है लेकिन चुनाव जिताने वालों की परवाह करने में देर भी लगाती है।आप यह जानकर चौंक जायेंगे की पूरे हिन्दुस्तान में रतलाम एक ऐसा जिला हैजहां पर किसान अंगूर की खेती करते हैं और फिर उसी अंगूर से वाईन की औद्योगिक ईकाई को सफलता के साथ संचालन कर रहे है।

अंगूर एक फल है जिसके प्रोसेस के बाद ही किसानों द्वारा वाईन बनाई जा रही है, यह जानकारी वाईन इंडस्ट्री के संचालक किसान पाटीदार ने राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि को जब बताया तो हम चौंक गए। लेकिन इस इंडस्ट्री को सरकार फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में स्िमलित करने की बजाये उसमें आबकारी नीति लागू कर रही है, जिसकी वजह से किसान अंगूर से वाईन तो बना रहे है लेकिन उसे आबकारी विभाग के अनुमति के बिना बेच नहीं सकते इससे बड़ा क्रूर मजाक किसानों के साथ क्या हो सकता है। इस एकमात्र एमबी वाईन इंडस्ट्री का सरकार यदि सभी जायज समस्याओं का हल ढूंढ ले तो वह दिन दूर नहीं होगा जहां अभी रतलाम के किसान 250 एकड़ जमीन में अंगूर की खेती करते हैं, उससे वाईन बनाते है और ऐसी वाईन जो मल्टीनेशनल कंपनियों की वाईन की गुणवāाा से भी बेहतर है,वहां पर हजारों एकड़ जमीन में अंगूर की खेती होने लगे, शर्त है सरकार इन बुद्धिजीवि किसानों के बारे में एक बार सोचे और एक बार उनकी तरफ देख ले।रतलाम जिले का दूसरा मुद्दा है नमकीन क्लस्टर जहां प्रस्तावित 200 इकाईयों में से मात्र15 इकाईयों ने काम शुरू किया है।एमआईडीसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर दुगनी कीमत पर पानी, तीगुनी कीमत पर बिजली लाईन और बैंकों का रवैया जीरो, मुख्यमंत्री जी बताईये रतलामी नमकीन क्लस्टर जिसका डिंढोरा खूब पीटा गया है,बेचारे नमकीन के उद्योगपति आखिर कैसे खड़े होंगे।बैंकों के पास नमकीन क्लस्टर का आदमी जाता है तो बैंक वाले लोन देने को तैयार नहीं होते कह देते है नमकीन के लिए क्या लोन देना जाइये जाइये जैसा चल रहा है चलाइये।गनीमत है जिला कलेक्टर नरेन्द्र सूर्यवंशी एक सकारात्मक सोच के अधिकारी नमकीन वालों को मिल गये है वे अपने जिला उद्योग केन्द्र के महा प्रबंधक मुकेश शर्मा को तानकर रखते है,और उन्हें नमकीन वालों के साथ सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराने का रोज-रोज निर्देश देकर नमकीन क्लस्टर का उत्साह बढ़ा रहे है।

राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस दौरे में चूंकि चुनाव का वक्त था इसलिए कलेक्टर से बात नहीं हो पाई परंतु कलेक्टर बंगले के जर-जर स्थिति के बारे में राज्य सरकार को तुरंत कोई निर्णय लेना होगा वर्ना 70 वर्षो से बना कलेक्टर बंगले की हर दीवार में पानी ही पानी है कब मंडीदीप की पुल की धसक जाये, कब कोई अप्रिय घटना हो जाये, कहा नहीं जा सकता।सूत्रों ने बताया हैकि कलेक्टर बंगले की जर्जर रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, सर्किट हाउस की खस्ता हालत सबको पता है, परंतु सायरन बजाती हुई कारें कभी इसकी चिंता नहीं करती, वरना शहर के बीचो बीच कलेक्टर का जर्जर होता बंगला, खस्ताहाल सर्किट हाउस की बाजार कीमत 500 करोड़ से कम नहीं है, शासन चाहे तो नया कलेक्टर बंगला, नया डीआईजी बंगला, नया एसपी बंगला और सर्किट हाउस सब शासन को बिना विāाीय बोझ लादे बनाये जा सकते है। शर्त है निर्णय करें शिवराज।

उपरोक्त कड़वी खबर का लब्बो लुआब यह है कि मालवा निमाड़ में सबसे तेज गति से विकास का केन्द्र बनने वाला है।रतलाम जिला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यसचिव इकबाल सिंह बैस की सतत स्वीकृतियों के इंतजार के लिए मुंह बाये खड़ा हुआ है यदि सीएस और सीएम ने सचमुच इस तरह के विकासशील बनने वाले जिलों की ओर गंभीरता से ध्यान दिया तो रतलाम जिले का काया पलट तो होगा ही लेकिन यदि मुंबई दिल्ली कोरिडोर का केन्द्र रतलाम भारत के नक्शे में सबसे बड़ा औद्योगिक गतिविधियों का और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पैराडाइस बन जाये तो चौंकिएगा मत…

विजय कुमार दास (मो.9617565371)
कड़वी खबर के लेखक इस समाचार पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं.