कांग्रेस मुक्त, भयमुक्त, गड्ढ़े मुक्त और निजी भूमि सरकार के अतिक्रमण से होगी मुक्त…

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को आत्मविश्वास हो गया है कि 2023 के विधानसभा चुनाव को भारतीय जनता पार्टी उनके ही चेहरे पर चुनाव लड़ सकती है, इसलिए आम जनता के हक में लोक लुभावन नीतियों के अलावा उन मुद्दों को लेकर जनता के बीच में जायेंंगे जिससे भारतीय जनता पार्टी के वोट प्रतिशत बढ़ जायें। सूत्रों के अनुसार शिवराज ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस के बढ़ते ग्राफ को लेकर चिंता जताई है। और अपनी नौकरशाही की टीम से ऐसी योजनाओं पर काम करने के लिए कहा है जिससे कांग्रेस के प्रति और विशेषकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के प्रति जनता का भरोसा मार्जिनल हो जाये। शिवराज के ऐजेंडे में मध्यप्रदेश को कांग्रेस मुक्त बनाने का काम पहला मुद्दा है। उसे वे सरकारी योजनाओं को मतदात केन्द्र तक पहुंचा कर जनता के बीच जाने की तैयारी में है। और उनकी कोशिश है कि कांगे्रस मुक्त मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की राजनैतिक संस्कृति में भी सुधार आना चाहिए और इसके लिए उन्होंने सबसे पहले अपने मंत्रीमंडल के सदस्यों की आजादी पर रोक लगा दी है। मतलब मंत्रियों से कहा गया है कि भाजपा के ऐजेंडे पर फोकस होकर काम करें। दूसरा ऐजेंडा शिवराज का यह है कि कांग्रेस का आरोप है मध्यप्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो चुकी है और महिला अपराधों में मध्यप्रदेश के अव्वल आने की स्थिति जरा चिंताजनक है और इसकी वजह से माफियों के हौंसले बुलंद है। और जनता में भय का वातावरण निर्मित हो चुका है इसे हर हालत में दूर करने के लिए पुलिस महकमें को आजादी से काम करने का अवसर दिया जायेगा। और इसी के चलते मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक के पद पर कई महीनों से पदस्थ वरियता में न्बर वन भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी सुधीर कुमार सक्सेना का नियमित आदेश जारी कर दिया जायेगा। बता दें कि पुलिस महानिदेशक सुधीर कुमार सक्सेना का आदेश अभी तक जारी नहीं हुआ है लेकिन वे अस्थाई आदेश के अनुसार पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्यरत है और यह स्थिति मध्यप्रदेश में पहली बार बनी है जब किसी मुख्यमंत्री ने अपने ही पुलिस महानिदेशक का रेगुलर आर्डर रोककर रखा है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस हफ्ते के अंदर मध्यप्रदेश को भयमुक्त करने की दिशा में पहला काम सुधीर कुमार सक्सेना के पुलिस महानिदेशक के पद पर रेगुलर आर्डर निकाल दिये जायेंगे ताकि सुधीर कुमार सक्सेना पूरी आजादी के साथ 52 जिलों की पुलिस अधिक्षकों से पूरे समन्वय स्थापित करते हुए उन्हें हर कीमत पर जिले को अपधरियों से मुक्त करने का टास्क दिया जायेगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का तीसरा एजेंडा बेहद खतरनाक है वह यह कि जो काम किसी ने सोचा नहीं था उस काम को लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई ने अपने विभाग के मंत्री गोपाल भार्गव से सहमति लेकर कर दिखाया है। सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश की खस्ताहाल सड़कों की वजह से 2003 में दिग्विजय सिंह की कांग्रेस सरकार जब सāाा से बाहर हुई तब से आज तक नहीं लौट पाई है हालांकि 15 महिनों के लिए 2018 में कांग्रेस के भाग्य से कमलनाथ के लिए मटकी फूट गई थी इस बात को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने नीरज मंडलोई के ऐजेंडे पर सहमति जाहिर करते हुए मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस से कहा है कि छ: महीनों के अंदर मध्यप्रदेश की सड़के गड्ढे मुक्त हो जानी चाहिए। सूत्रों के अनुसार लोकनिर्माण विभाग इस काम को अंजाम देने में जुट गया है। समझा जाता है कि मध्यप्रदेश में शिवराज ने एक चौथे मुद्दे पर भी काम किया है सीलिंग की जमीनों का निराकरण नहीं होने से सभी बड़े जिलों में हजारों प्रकरण न्यायालय में अनावश्यक रूप से लंबित है। आप यह जानकर चौंक जायेंगे कि सरकार भूमाफियाओं से हजारों एकड़ सरकारी जमीन पर से अतिक्रमण हटाने का दावा कर रही है लेकिन जिन भूस्वामियों की जमीन उच्च न्यायालय द्वारा और तो और उच्च न्यायालय के डबल बैंच के द्वारा भी सीलिंग से मुक्त किया जा चुका है। उन जमीनों में भूस्वामियों को बिना कोई मुआवजा दिये कलेक्टरों ने सरकारी खाते में दर्ज कर लिया है। सालों से भटक रहें निजी भूस्वामी जिसमें कई किसान भी है, शिवराज सरकार को इसलिए कोस रहे है कि मुख्य न्यायालय द्वारा सीलिंग से मुक्त हुई भूस्वामियों की जमीनों का निराकरण करने के लिए कलेक्टर सौ बार चक्कर लगवाते है। और आखिरी में कह देते है कि हम तो सुप्रीमकोट जायेंगे। मतलब स्पष्ट है कि सीलिंग से न्यायालय द्वारा मुक्त हुई जमीनों पर भी सरकार का बैजा कब्जा है इस बात को पहली बार राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत तथा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दोनों ने समझ लिया है, और ऐसी स्थिति में यह संभव है कि भारतीय जनता पार्टी की चुनावी घोषणा पत्र में शिवराज सिंह चौहान इस मुद्दे को भी जोड़ते हुए वायदा कर सकते है कि सीलिंग से मुक्त हुई जमीने भू स्वामियों को लौटाई जायेंगी। इस विशेष रिपोर्ट का लब्बो लुआब यह है कि मध्यप्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान के चेहरे पर 2023 का विधानसभा चुनाव यदि लड़ा जायेगा तो मध्यप्रदेश में भी प्रमुख एजेंडा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ही होगा लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उपरोक्त चार मुद्दों को चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने के पहले निर्णय की स्थिति में पहुंचा दिया जाये तो चौकिएगा मत।