किसी ने सच ही कहा है, सिफारिश से बने कलेक्टर, एसपी मैनेजर बन जाते हैं तब होता है झाबुआ…

मध्यप्रदेश में सनातन काल से कलेक्टर, एसपी की पदस्थापना जिलों में दो तरीके से होती आई है। एक तरीका कलेक्टर एसपी बनाने का साफ-सुथरा होता है, मतलब मान लिया जाता है कि बिना सिफारिश के कलेक्टर, एसपी बनने वाले अधिकारी काम अच्छा करते है। और उनके कामों के आधार पर उन जिलों में सरकार की छवि बनती है। जहां तक सवाल है दूसरे तरीके का ऐसे कलेक्टर, एसपी या तो राजनैतिक सिफारिशों के आधार पर बनते है या मैनेजमेंट के आधार पर बन जाते है। हालाकि इनमें से भी कुछ अपने काम का प्रदर्शन पहले तरीके के अधिकारियों से ज्यादा अच्छा कर लेते है। लेकिन जो कलेक्टर, एसपी सिफारिश अथवा मैनेजमेंट से जिलों में जाते है, वे उन जिलों में जाकर तांडव करते है। हाल ही में झाबुआ में हुई घटना जिसमें कल मुख्यमंत्री को वहां के कलेक्टर, एसपी को तत्काल प्रभाव से बदल दिया, यह एक जीता जागता उदाहरण है। एक पूर्व मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते है कि जो कलेक्टर, एसपी सिफारिश और मैनेजमेंट से जायेगा वह केवल दो लोगों का काम करेगा। एक वे लोग होंगे जो यह कहेगें कि हमने सिफारिश की थी तुम कलेक्टर बने अब हमारा काम करो तुमको किसी से कोई लेना देना नहीं है, जनता जाये तेल लेने। दूसरा अधिकारी जो मैनेजमेंट से जाता है उसके पास एक ही वाक्य होता है, बॉस इज ऑल राइट जनता का काम तो हम कर ही रहे हैं। और इसी चक्कर में सरकार की छवि की बैंड बज जाती है। उपरोक्त पूर्व मुख्य सचिव के जमाने में भी ऐसा होता रहा होगा लेकिन वर्तमान मुख्य सचिव के मैनेजमेंट सिस्टम से साहब परेशान है, उनके जमाने में मेनेजमेंट 5 प्रतिशत था और आज 50 प्रतिशत से उपर है तो कलेक्टर एसपी पर नियत्रंण का आधिकार सिमट जाता है, फिर वहीं होता है जो हो रहा है। राष्ट्रीय हिन्दी मेल का तो यह कहना मानना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक बार केवल उन लोगों को कलेक्टर, एसपी बनाकर देखें जिनकी किसी ने आज तक सिफारिश नहीं की है। और ऐसे लोगों को बनाये जो आज तक मैनेजमेंट के अभाव में कलेक्टर नहीं बन पाये है। फिर देखिए प्रशासन में गुड गर्वनेंस की व्याख्या कितनी खुबसूरत होती है। एक सूचना के अनुसार 18 जिलों में कलेक्टर और एसपी पूअरपरर्फामर है। इन जिलों में 2008 बैच से लेकर अभी तक जिनको कलेक्टर- एसपी बनने का मौका नहीं मिला है, उन्हे कलेक्टर-एसपी बनाकर देखिये साहब 2023 में जीत की मोहर आपके बिना कहे लग जायेगी। वर्ना उधर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को कुछ नहीं करना है जनता ही उन्हे थाली परोस कर देगी और आप 2023 के विधानसभा चुनाव तक झाबुआ-झाबुआ कहते रहेगे। हमने एसपी हटा दिया, कलेक्टर हटा दिया, हमने सस्पेंड कर दिया…। खबरची