जमीनी स्तर पर राजनैतिक गोटियाँ बैठाने में माहिर दिग्विजय…75 की उम्र में राहुल के साथ कर रहे हैं कदमताल

विशेष रिपोर्ट: अनीता चौबे (मो. 9893288371)
काँग्रेस पार्टी के राजनीतिक परिदृश्य से लगभग ओझल चल रहे मध्यप्रदेश के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह फिर से मुख्यधारा में लौटते हुए दिखाई दे रहे है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के लिए दिग्विजय सिंह ही जमीन तैयार कर रहे है। देश के दक्षिण से उāारी कोने तक होने वाली राहुल की इस यात्रा के आयोजन की ज्मिेदारी की कमान दिग्विजय सिंह ने अपने हाथों में ले रखी हैं। इसके पहले दिग्विजय नर्मदा परिक्रमा यात्रा कर मध्यप्रदेश में कांग्रेस को सāाा में वापसी करवा चुके है। दिग्विजय के पास पदयात्रा का अनुभव ही नहीं, छह से ज्यादा प्रदेशो में प्रभारी रहे दिग्विजय को देश की राजनीति की अच्छी-खासी समझ भी है और पकड भी। इन्हीं सभी बातों के चलते दिग्विजय सिंह को यह महत्वपूर्ण ज्मिेदारी दिए जाने की बात सामने आ रही है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का बतौर प्रदेश के मुख्यमंत्री एक लंबा अनुभव है। इसके अलावा नर्मदा यात्रा में एक यात्री के तौर पर भी उन्हें अच्छा खासा अनुभव है। 2017 में नर्मदा यात्रा के दौरान दिग्विजय को जो भी अच्छे या बुरे अनुभव मिले होंगे। वह जरुर उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ों यात्रा में शामिल करते चलेंगे। जिससे राहुल की यह यात्रा आसान हो सके,क्योंकि बतौर यात्री दिग्विजय को पता है कि एक यात्रा के दौरान कैसी कठिनाई आती है और किस तरह की चुनौतियां सामने होती है। इसके अलावा कैसे जमीनी स्तर का इनपुट जुटाया जा सकता है। हालांकि, दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा कोई राजनीतिक यात्रा नहीं थी। वह केवल एक या दो प्रदेश तक सीमित होकर एक आध्यात्मिक यात्रा थी। जो उन्होंने स्वयं के आध्यात्मिक चिंतन के लिए थी। इस दौरान वे साधु संतों से मिलते थे। गांवों में प्रवास करते थे और साधारण भोजन करते थे।लेकिन दिग्विजय की य़ह यात्र प्रदेश के करीब 70 से 80 विधानसभा सीटों से होकर गुजरी थी। इसका सीधा फायदा कांग्रेस को 2018 के विधानसभा चुनावों में मिला था,क्योंकि जिस भी क्षेत्र से नर्मदा यात्रा गुजरती थी। वहां के कार्यकर्ता और नेता बड़ी संख्या में दिग्विजय से मिलने आ जाते थे। वे सामान्य चर्चा में ही जमीनी हकीकत का जायजा ले लेते थे। साथ ही कांग्रेस की स्थिति का आकलन भी करते थे। कहीं न कहीं 2018 चुनावों में दिग्विजय के इस होमवर्क का नतीजा भी कांग्रेस को मिला। जिससे पार्टी सāाा पर काबिज हो सकी। दिग्विजय सिंह कांग्रेस पार्टी में एक अनुभवी राजनेता हैं। वे मध्यप्रदेश में करीब दस वर्ष तक मुख्यमंत्री रहे है। कार्यकर्ताओं की नब्ज को वह बहुत अच्छे से समझते है। पार्टी के लिए वह जो भी व्यूह रचना तैयार करते है, वह बहुत ही बेजोड़ होती है। जिसका फायदा हमेशा संगठन को मिलता रहा है। पर्दे के पीछे से काम करने के मामले में दिग्विजय सिंह की कोई तुलना नहीं है। किसी भी मुद्दे पर स्पष्ट बोलने के कारण वे जनता में जरूर अलोकप्रिय हुए है। लेकिन आज भी वे कांग्रेस के लिए उपयोगी नेताओं में से एक है। इसलिए राहुल गांधी की भारत जोड़ों यात्रा के आयोजन समिति के अध्यक्ष की ज्मिेदारी दिग्विजय सिंह को दी गई हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह हमेशा अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन इन दिनों उनकी सादगी की चर्चा हो रही है। दिग्विजय संभवत: सबसे उम्रदराज नेता हैं, जो ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के हिस्से के रूप में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और हजारों अन्य लोगों के साथ रोजाना 24 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। 75 वर्षीय दिग्विजय सिंह, जो कन्याकुमारी से कश्मीर तक 3,500 किलोमीटर के इस मार्च के योजनाकारों में से एक हैं, जो 7 सितंबर को शुरू हुई यात्रा के बाद से राहुल गांधी के साथ हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री के बाद वे पूरे देश की राजनीति में सक्रिय भूमिका में रहे। मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद है। उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा समेत कई राज्यों के प्रभारी रहे। हिंदी के साथ अंग्रेजी भाषा में भी उनकी अच्छी पकड़ हैं। छāाीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र की राजनीति को भी करीब से समझते है। सभी राज्यों में कार्यकर्ताओं और समर्थकों का एक तगड़ा नेटवर्क है। इसलिए कांग्रेस पार्टी को एक ऐसा नेता की जरूरत थी जो जमीन पर एक्टिव होकर इस यात्रा को कार्डिनेट कर सके।