कलेक्टर बनने की आस में गला सूख गया

मध्यप्रदेश मेें शिवराज सरकार ने संकेत दिये थे कि मंत्रीमंडल का विस्तार और बड़ी प्रशासनिक सर्जरी कभी भी हो सकती है। इसी के चलते 2008 बैच से लेकर अभी तक जो आईएएस अधिकारी कलेक्टर नहीं बन पाये है। उनके मन को निराशा ने घेर लिया है। हालात यह है कि कटनी,छतरपुर, धार, होशंगाबाद, भिण्ड, मुरैना, शिवपुरी, नीमच, मंदसौर और गिरे से गिरे सबसे छोटे जिलों में भी जाने को तैयार ऐसे अधिकरियों को बड़े ठेकेदार की सिफारिश पर भरोसा हो गया है। मंत्रालय में एक युवा अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के लिए अब वह ठेकेदार इतना महत्वपूर्ण है कि आधा दर्जन आईएएस अधिकारी उक्त ठेकेदार के चक्कर लगा रहे है, वे कहने लगे है कि मैरिट पर कलेक्टर बनने की उ्मीद खत्म हो गई है। उक्त युवा अधिकारी ने यहां तक कहा कि एक दो महिला आईएएस अधिकारी कहते है शिवराज सरकार में कलेक्टर बनने की उ्मीद से नौकरी करना अपने आप को तनाव में रखना है। और तो और उक्त युवा अधिकरी के अनुसार दो महिला आईएएस अधिकारी और चार आई एस अधिकारी ऐसे है। जिनका कलेक्टर बनने के इंतजार में गला सूख गया है। समझा जाता है कि कलेक्टर बनने की ललक पाल कर रखना मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के रहते संभव ही नहीं इसलिए इंतजार करिए समय जरूर बदलेगा…।