कलेक्टर हैं या स्पाइडरमैन…

मध्यप्रदेश में आजकल माफिया विरोधी अभियान को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का तेवर तीसरे आसमान पर है। मुख्यमंत्री के इस मिजाज को समझते हुए 52 जिलों के 52 कलेक्टर अब मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के रडार पर ही काम कर रहे हैं। इसी श्रृंखला में दो बड़े जिले के कलेक्टर आजकल स्पाइडरमैन की तरह एन्टीमाफिया विरोधी अभियान में कभी जमीन पर तो कभी आसमान से अवैध निर्माणों की और अतिक्रमण की लंबाई चौड़ाई मापलेते हैं। महानगर का आकार ले चुके इन जिलों के कलेक्टर किसी भी बड़े-से-बड़े रसूखदार का भी अतिक्रमण तोडऩे में एक क्षण भी नहीं गवांते। और तो और यदि किसी व्यक्ति ने उनका करीबी होने का दावा करते हुए अतिक्रमण किया होगा तो उसकी तो खैर नहीं। सूत्रों के अनुसार इंदौर में चंद दिनों पहले कुछ ऐसा ही हुआ एक नामी ख्याति प्राप्त उद्योगपति के द्वारा विक्रय के बाद जिस आदमी ने बड़ा टॉवर बना लिया था उसे कलेक्टर साहब के करीबी होने का भ्रम कलेक्टर ने ही तोड़ दिया। खबर लगते ही कि वह भवन अवैध निर्माण से लैस था तो चल गया बुलडोजर। इंदौर में तो यहां तक कहा जाता है कि सरकारी जमीन हो या सरकारी छत कौवा भी बैठ जाये तो उसका अंत सुनिश्चित है। उधर दूसरी ओर महानगर का स्वरूप लेता हुआ जबलपुर जहां पर जिले के कलेक्टर ने अब तक 17000 वर्गफिट बेशकीमती जमीन जब से एक माफिया से अतिक्रमण मुक्त कराई है वहां पर भी कलेक्टर को स्पाइडरमैन की संज्ञा दी जा रही है। बस दोनों जिलों में तकलीफ बैचारे निरीह एवं गरीब आदिवासियों की जिन्हें उच्च न्यायालय के कई बार आदेशों के बाद भी ना तो उनकी जमीन उन्हें मिलती है और ना ही उन्हें मुआवजा दिया जाता है लेकिन इसमें गलती चूक कलेक्टर की नहीं है। बताया जाता है कि गरीबों एवें आदिवासियों की ऐसी भूमियों पर जिसमें उच्च न्यायालय के आदेश है, तहसीलदारों के भ्रष्ट आचरण की वजह से ये बेचारे दर-दर की ठोकर खाने को तैयार है क्योंकि केस लडऩे को पैसा नहीं है और सरकार ने इनकों मुआवजा भी नहीं दिया। कलेक्टर यदि स्पाइडरमैन बन गए है तो फिर एक हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि अतिक्रमण माफियाओं के चुंगल से मुक्त हो किसी को ऐतराज नहीं लेकिन जब कलेक्टर न्याय की कुर्सी में बैठते है तो फिर उन्हें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनसेवा अभियान को ध्यान में रखकर काम करना होगा। उल्लेखनीय है कि उपरोक्त वाक्या इंदौर जिला कलेक्टर मनीष सिंह और जबलपुर जिला कलेक्टर टी. इलैय्या. राजा को लेकर ही लिखा गया है फर्क केवल इतना है कि मनीष सिंह 5 फीट 8 इंच के स्पाइडरमैन है और टी.इलैय्या.राजा मात्र 5 फीट 3 इंच है।