तबादलों पर से ताला हटा, कुछ मंत्रियों के ओएसडी बोली लगाने लगे. कर्मचारी अधिकारी परेशान…

मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब तबादलों पर प्रतिबंध हटते ही कुछ मंत्रियों के ओएसडी इसे अपने 7 पीढिय़ों का इंतजाम समझ रहे हैं। मंत्रियों को पता है या नहीं यह एक अलग बात है। लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि मंत्रियों के ओएसडी ऑनलाईन पोर्टल की व्यवस्था होने के बावजूद भी ऐसा जुगाड़ करने में सफल हो गये है, जिससे मास्टर, पटवारी, नर्स, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर, खनिज अधिकारी और आदिम जाति कल्याण विभाग छोटे छोटे कर्मचारी सब के सब फंसे फंसे नजर आते हैं। क्लास वन अधिकारियों की तो बात ही और है उनसे तो कहा जा रहा है, कि तीन साल हो गया, दो साल और रहना है और कही ओर जाना है तो उसकी भी कीमत बता दो हम मंत्री जी से सब करा लेंगे। तबादलों को लेकर भ्रष्टाचार का घमासान तांडव पहले भी होता था लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ। पाँच सितारा होटलों में कुछ कन्सलटेंट बने लोग मंत्रियों से काम कराने के नाम पर पहले कमरा बुक कराते है लंच, कॉकटेल डिनर करते है और होटल वाले से भी कमीशन खा लेते है, और तबादला हो या टेंडर फंसने वाले व्यक्ति को लाखों का चूना भी लगा देते है। एक द्वितीय श्रेणी अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा है उनके विभाग में तबादलों की दुकान बंद है और मंत्री जी, जब तक आवश्यक ना हो, परिस्थितियां जब तक अनुमति ना दे तब तक तो वे किसी आवेदक को बंगले में भी नहीं घुसने देती। जाहिर है ऐसी महिला मंत्री अनुशासन की कड़क और नियमों के प्रति प्रतिबद्ध श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, सुश्री उषा ठाकुर के अलावा कोई और नहीं है। परंतु उक्त अधिकारी का मानना है कि मुख्यमंत्री, विāा मंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री को छोड़ दिया जाये तो बाकी मंत्रियों के यहां तबादलों के मामले में मंत्रियों से ज्यादा ओएसडी पावरफुल है ऐसा कहा जायें तो चौकिएगा मत….। –खबरची