मोदी को मानते हैं-मोदी जैसा करते नहीं शिवराज

कड़वी खबर: विजय कुमार दास (मो. 9617565371)
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जैसा मेहनती एवं व्यस्ततम मुख्यमंत्री पूरे देश में कोई भी नहीं है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। लेकिन इसके बावजूद शिवराज सिंह चौहान 19 वर्ष मुख्यमंत्री के रूप में परिपक्व नेता बन कर ही क्यों रह गये हैं, जननायक अभी तक क्यों नहीं बन पाये, यह सवाल 100 डॉलर का हो गया है इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता। वरना 19 वर्ष के मुख्यमंत्री को 12-12 घंटे की बैठकों में समीक्षा के लिए समय बिताने एवं 18-18 घंटे लगातार भारतीय जनता पार्टी की जीत के लिए प्रदेश के कोने- कोने में जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती । हमने कल जब यह लिखा था कि मध्यप्रदेश में हिन्दूत्व की लहर को मजबूती नहीं मिल पाई है इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह को बार-बार मध्यप्रदेश आना पड़ रहा है यह एक रहस्य नहीं बल्कि तथ्य आधारित कारणों में से एक प्रमुख कारण है। उपरोक्त समाचार को लेकर हमारे सैकड़ों पाठकों ने यह प्रतिक्रिया व्यक्त की है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री मध्यप्रदेश की जनता को यह संदेश देना चाहते है कि शिवराज सिंह चौहान का नेतृत्व नहीं बदला जाएगा, वे इसलिए बार-बार मध्यप्रदेश आ रहे है इसका कोई दूसरा अर्थ नहीं निकाला जा सकता। परंतु कुछ पाठकों ने जो राजनीति से संबंध नहीं रखते उनका कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिहं चौहान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भगवान मानते हैं, वे भाषणों में यहां तक भी कहते है कि मोदी के बिना दुनिया नहीं चलने वाली, और तो और नरेन्द्र मोदी को शिवराज सिंह चौहान देश के लिए वरदान मानते है परंतु इन सब के बावजूद वे मोदी जैसा कर नहीं पाते यह अच्िभत करने वाला वाक्या है। उपरोक्त पाठकों ने मोदी जैसा नहीं कर पाने की शिवराजी राजनीति को 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव दोनों के अनुकूल मानने से इंकार कर दिया है। हमारी इस कड़वी खबर में पड़ताल के बाद यह लिखे जाने में हमें संकोच नहीं है कि यदि शिवराज सिंह चौहान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह माइक्रो लेबल पर जाकर मुद्दे को हल करने लगे तो यह मान लेने में किसी को ऐतराज नहीं होगा कि 2023 और 2024 दोनों चुनाव भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश में भी केवल और केवल मोदी के चेहरे पर ही 100 प्रतिशत चुनाव जीतेगी। यदि आपको स्मरण हो जब जयशंकर प्रसाद चीन में ए्बेसडर हुआ करते थे और नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में चीन पहुंचे थे तो दोनों के बीच की लंबी बैठक के बाद जयशंकर प्रसाद ने कहा था कि नरेन्द्र मोदी पहले मुख्यमंत्री है जो मुद्दे की तह तक जाते है और माइक्रो लेवल पर जाकर मुद्दे का हल ही नहीं ढूंढते बल्कि उसे परिणाम तक पहुंचाते है। जयशंकर प्रसाद के इस कोट का यहां पर जिक्र इसलिए किया जा रहा है क्योंकि आज वही जयशंकर प्रसाद विदेश मंत्री है जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आज भी विदेश नीति से लेकर जनहित के सभी मुद्दों पर माइक्रो लेवल मॉनिटरिंग की वजह से उन्हे वे हिन्दुस्तान का जननायक मानते है। मतलब यदि मध्यप्रदेश के मुख्यमंंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मोदी की तरह फैसले करने लगे तो भारतीय जनता पार्टी के हाथों से आगामी 10 वर्षों तक कोई भी हाथ सāाा नहीं छिन पायेगा, वरना कांग्रेस के कमलनाथ के लिए रास्ते आसान है। जानकारों कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह यदि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी जननायक बनना हो और भारतीय जनता पार्टी की जीत को सुनिश्चित करना हो तो सबसे पहले उन्हें अपने परिवार के अलावा माइक्रो लेवल पर जाकर रिश्तेदारों दूरी बनानी होगी मतलब यह भी नहीं कि आप माता- पिता, पत्नी और बाल-बच्चों से दूरी बना ले, लेकिन तथा कथित मौसमी रिश्तेदारों से दूर रहने में बुराई नहीं। दूसरा महत्वपूर्ण मोदी की तरह आचरण उन्हें अपनी उस नौकरशाही के साथ करना होगा, जिन्होंने मुख्यमंत्री को कोटरी की तरह घेर रखा है और ईमानदार से ईमानदार नेता, सत्यम शिवम सुंदरम भाजपा के कार्यकर्ता, प्रखर आलोचक 24 कैरेट का खांटी पत्रकार और काम करने वाले ईमानदार को मुख्यमंत्री से मिलने ही नहीं देते। सही सूचनाओं और भाजपा कार्यकर्ताओं की अमान्यताओं ने अब एंटी इंकमबेन्सी को वढ़ा दिया है यह बात शायद देर से समझ में आने वाली है। तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि मध्यप्रदेश में हिन्दू-मुसलमान केवल तीन संभागों में है, मतलब इंदौर, भोपाल और उज्जैन बाकी सात संभाग ऐसे है जहां पर भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है जाति आधारित राजनीति, निचली नौकरशाही में अकूत भ्रष्टाचार और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को स्मान और समान दोनों ंप्राप्त नहीं होने के कारण भयंकर आक्रोश जिसे शिवराज सिंह चौहान को माइक्रो लेवल पर डील करना ही होगा। चौथी और अंतिम सबसे बड़ी चुनौती केंद्रीय सहायता से मिली बड़ी-बड़ी योजनाओं में भी क्रियान्वयन को लेकर लेट लतीफी, लाल फीताशाही की वजह से राज्य सरकार की बदनामी को एक दो अच्छे कामों से पूरी तरह ढंकने की कोशिशे ऐसी है जिससे भाषणों में तालियां तो बजती है लेकिन सबको पता है आगे पाट पीछे सपाट और इसके कभी माइक्रो लेवल पर जाकर सवाल नहीं उठाये जाते। हमारी इस कड़वी खबर का लब्बोलुआव यह है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिहं चौहान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जितना जानते है उससे ज्यादा उन्हें मानते भी है परंतु यह कड़वा सच भी है यदि शिवराज सिंह चौहान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह माइक्रो लेवल पर जाकर निर्णय करने लगे तथा संवादहीनता समाप्त करते हुऐ ओपन टू-द-गुड सजेशन हमेशा रहे और गुमराह करने वाले नौकरशाह चाहे कितना भी बड़ा हो उससे माइक्रो लेवल पर जाकर डील करेंगे तो भारतीय जनता पार्टी का चुनाव जीत जाना उतना अहम नहीं होगा, जितना कि शिवराज सिंह चौहान का मध्यप्रदेश में जननायक बनकर उभर जाना।