विश्वास का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में भी जुड़ेगा

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विशेष संपादकीय: विजय कुमार दास, मो. 9617565371
विश्व के इतिहास में आज मध्यप्रदेश का नाम स्वर्ण अक्षरों में उस समय दर्ज हो गया जिस क्षण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भोपाल के लाल परेड मैदान में एक लाख छात्र-छात्राओं के सामने मेडिकल की पढ़ाई से संबंधित एमबीबीएस की प्रथम वर्ष के हिन्दी भाषा में पुस्तकों का लोकार्पण किया। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वभाविक है इस पल वे फूले नहीं समाए लेकिन गर्वोक्ति का अहसास सबसे अधिक किसी राजनेता में था तो उसका नाम निश्चित रूप से चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलास सारंग ही होना चाहिए। यह बात इसलिए भी लिखी जा रही हंै क्योकि चीन, जापान, इटली, जर्मनी, स्पेनिस, रूस और फे्रंच भाषा में जब मेडिकल की पढ़ाई हो सकती है तो हिन्दुस्तान की मातृ भाषा हिन्दी में क्यों नहीं हो सकती इस सवाल का हल ढूंढऩे में विश्वास कैलास सारंग ने अपने राजनैतिक जीवन की प्रतिष्ठा को दांव पर लगा दिया। हालाकि यह अविष्कार भरा जोखिम सारंग ने मुख्यमंत्री की जिजिविषा को दिन में देखे गए सपने की तरह पूरा करने में अपने विभाग के शीर्ष नौकरशाह मोह्मद सुलेमान की वजह से पूरा कर पाए इसमें संदेह नहीं है। इस विशेष संपादकीय का लब्बोलुआब यह है कि मेडिकल की हिन्दी भाषा में पढ़ाई की शुरूआत शिक्षा के क्षेत्र में यदि विश्व स्तर की ख्याति प्राप्त करने वाली पहली घटना हैं तो इसके साथ-साथ उन 97 प्राध्यापकों की 212 दिनों की मेहनत को परिणाम तक या फिर गृह मंत्री अमित शाह के शब्दों में लॉजिकल एंड तक पहुंचाने की चुनौती हमेशा रहेगीं। यदि विश्वास कैलास सारंग इस चुनौती से पार पाने में सफल हो जाते हैं तो हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई की शुरूआत के लिए मध्यप्रदेश का नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज हो जाए तो चौकिएगा मत….।