उत्तरप्रदेश की तरह मध्यप्रदेश में हिन्दुत्व नहीं आया इसलिए बार-बार आ रहे है ‘नरेन्द्र मोदी-अमित शाह यहां पर…

विशेष संपादकीय- विजय कुमार दास (मो. 9617565371)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का मिशन 2023 विधानसभा चुनाव और मिशन 2024 लोकसभा चुनाव में हर हाल भाजपा की जीत सुनिश्चत करना एकमात्र लक्ष्य है। लेकिन इस लक्ष्य के पीछे मोदी और अमित शाह का एजेंडा भी स्पष्ट है, वह यह कि उत्तरप्रदेश की तर्ज पर पूरे देश में हिन्दुत्व की लहर फैल जानी चाहिए। समझा जाता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को मध्यप्रदेश के मामले में अभी तक यह भरोसा नहीं मिल पाया है कि यूपी की तरह भाजपा को यहां पर भी 2023 में क्लीन स्वीप मिल जायेगा, और इसीलिए काशी विश्वनाथ के अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर आस्था का सैलाब पैदा करने के लिए प्रधानमंत्री ने मध्यप्रदेश के सबसे बड़ी धार्मिक नगरी उज्जैन को महाकाललोक कॉरीडोर की स्थापना में पूरी सरकार को झोंक दिया है। लगभग 900 करोड़ के बजट की स्वीकृति के साथ महाकाललोक कॉरीडोर के पहले चरण का शुभारंभ समारोह 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ जिसमें 316 करोड़ का व्यय पूरा हो चुका है यह प्रशासन का दावा है। हालाकि जानकारों का कहना है कि महाकाललोक कॉरीडोर के द्वितीय एवं तृतीय चरण के भी बजट का आबंटन किया जा चुका है और 60 प्रतिशत काम भी पूरे हो चुके बताये जा रहे है। वास्तविकता का पता तो महाकाललोक के द्वितीय चरण के आगाज पर ही पता चलेगा। उधर दूसरी और गृहमंत्री अमित शाह के भोपाल एवं ग्वालियर दौरे को भी विधानसभा 2023 और लोकसभा 2024 के मिशन से ही जोड़कर देखा जा रहा है। इसलिए यह लिखने या कहने में संकोच नहीं है कि मध्यप्रदेश में हिन्दुत्व की लहर मतदाताओं में करंट की तरह अभी नहीं पनप पाई है,और यही कारण है कि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह बार-बार मध्यप्रदेश आ रहे है और जब तक उन्हें भरोसा नहीं हो जायेगा कि उāार प्रदेश जैसा माहौल मध्यप्रदेश में बन गया है तब तक वे आते ही रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह मालवा और विंध्यप्रदेश में कुछ बड़ा करना चाहते है। इसी के चलते मालावा से सटे गुजरात के मतदाताओं पर हिन्दुत्व का असर पूरा-पूरा हो इसलिए संभवत: मालवा आंचल के दौरे पर कई बार आयें तो चौकिएगा मत। माना कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह मध्यप्रदेश में विधानसभा का चुनाव 200 पार का लक्ष्य लेकर जीत जायेंगे, लेकिन इन दोनों राष्ट्रीय नेताओं को मध्यप्रदेश का राजनैतिक भूगोल भी समझना होगा वरना भाजपा जीत जायेंगी लेकिन जनता हार जाये तो इसे भाजपा की सफलता से जोड़कर देखना भी न्याय संगत नहीं होगा। इस विशेष संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृहमंत्री अमित शाह को यह बताने की कोशिश की जा रही है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नेतृत्व मजबूत होते हुए भी उāारप्रदेश की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार को रोकने तथा हिन्दुत्व की पाठशाला को राष्ट्रीय ऐजेंडे में शामिल करने में हम कमजोर साबित हुए हैं, इस सच्चाई को स्वीकार करने में हर्ज नहीं है। भ्रष्ट्राचार में 0 टॉलरेस की घोषणा करने वाले मुख्यमंत्री को रोज लापरवाही के आरोप में किसी-न-किसी शासकीय सेवक को सजा सुनानी पड़ती है। और तो और 9 अक्टूबर को अर्थात प्रधानमंत्री की यात्रा के ठीक 2 दिन पहले नगर निगम आयुक्त को उज्जैन से हटाना पड़ा। उसके ठीक एक हफ्ते पहले झाबुआ है एसपी को निल्िबत करना पड़ा कलेक्टर को हटाना पड़ा। जिस विभाग के मुख्यमंत्री स्वयं मंत्री है उस विभाग में ही पोषण आहार में हुई हेराफेरी के लिए ज्मिेदार किसी बड़े अधिकारी को अभी तक सजा नहीं मिलीे। बिजली विभाग में तो आलम यह है कि प्रधानमंत्री प्रोत्साहन रोजगार योजना में जालसाजी करने वाले मैनपावर आउटसोर्स के कंपनीयों को विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने ऐसे गले लगाया कि ब्लेक लिस्टेड होने के बाद उनके खिलाफ एफआईआर में इतनी देरी की गई कि वे सभी ठेकेदार न्यायालय के शरण में पहुंच गये। दूसरी ओर बिजली विभाग का आलम यह है कि सरप्लस पावर स्टेट होते हुए भी बिजली कटौती की सीमायें तय नहीं है। गाँवों में बिजली कब आयेगी क ब जायेंगी इसका पता नहीं है लेकिन बिजली के बिल अनाप-शनाप जरूर आयेंगे और सरकार से गरीब जनता का नाराज होना भाजपा के लिए कितना नुकसान दायक है यह 2023 के चुनाव में ही पता चलेगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली पारदर्शी माध्यम को छोड़कर गरीबों में राशन, नमक, तेल का वितरण इतना अव्यवस्थित हो गया है कि उस बदनामी से पार पाना मुश्किल है। नौकरशाही का एक वर्ग तो चाहे अनचाहे दोनों स्थितियों में कांग्रेस के कमलनाथ को फायदा पहुंचाने में जुटे हुए है इसका सीधा-सीधा फंडा है कि विकास के कामों में रोड़े अटकाओं, मुख्यमंत्री सवाल पूछे तो कह दो बजट नहीं है, फंड का आभाव है काम कैसे किया जाये। बेचारे मुख्यमंत्री सुरक्षात्मक मुद्रा में बयान देते फिरें यही एकमात्र उनके पास विकल्प है। और तो और तबादलों का आलम यह है कि सब मंत्री दुखी हैं लेकिन उनके चुनिन्दे ओएसडी करोड़ों अरबों के मालिक हो गये है। रहा सवाल हिन्दुत्व का एजेन्डा मध्यप्रदेश में कमजोरक्यों है इस सवाल की तह में जब आप जाते हैं तो उāार मिलता है, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक, भाजपा के संस्थापक की भूमिका में मीसाबंदी हजारों कार्यकर्ता, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, डॉ.राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी वाजपेयी और इसके आगे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विचारों को लेकर पत्रकारिता में पूरी जिन्दगी समर्पित कर देने वाले मीडिया कर्मियों को जब आप अपने एजेंडे से बाहर रखकर रणनीति बनायेंगे तो फिर यह उ्मीद करना बिल्कुल ही न्याय संगत नहीं है, कि मध्यप्रदेश में उāारप्रदेश की तरह हिन्दुत्व का ऐजेन्डा मजबूत रहेगा। इस तथ्य को संभवत: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने और गृहमंत्री अमित शाह ने अच्छी तरह समझ लिया है इसीलिए वे बार- बार मध्यप्रदेश आ रहे है। यह एक ऐसी सच्चाई है जिसे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी आज नहीं तो कल समझना ही होगा, वरना भारतीय जनता पार्टी 2023 में चुनाव जीत जायेगी इसमें संदेह नहीं है लेकिन इसमें भी संदेह नहीं है कि जनता हार जायेगी।