शर्मिदा होना पड़ता है अब तो आईएएस कहलाने में भी…..

मध्यप्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस में आए कुछ अधिकारियों में घोर निराशा का वातावरण बन गया है। सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के रवैये इन प्रमोटी आईएएस अधिकारियों को आईएएस कहलाने लायक भी नहीं रखा है। समझा जाता है कि, 2008 तथा 2010 के ऐसे अधिकारी जिनके खिलाफ न तो कोई विभागीय जांच है और न ही उनकी जिला कलेक्टर बनने की काबलियत में कोई कमी है। फिर भी जब ऐसे अधिकारियों को जिले में कलेक्टर के पद पर आज तक पदस्थ नहीं किया गया है तो स्वाभाविक है, ये बेचारे अपना दुखड़ा किसी से सुना भी नहीं सकते। एक महिला आईएएस अधिकारी तो यह कहते-कहते कई बार इतनी भावुक हो जाती है कि वे कहने लगती है, हम इस सरकार में जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रतिदिन महिला सशक्तिकरण को लेकर नई-नई घोषनाएं करते है, जिसे सुनकर हम महिलाएं अति उत्साह में बढ़-चढ़कर काम कर रहे है, फिर भी हमें जिले में मौका नहीं दिया जाता है। कई बार तो 2008 बैच की यह महिला आईएएस अधिकारी और 2010 बैच के एक ग्वालियर-चंबल संभाग में पदस्थ आईएएस अधिकारी अपने मित्रों से और परिवार के लोगों से यह कहने भी लगे हैं कि उन्हें आईएएस कहलाने में भी शर्मिदा होना पड़ता है, जबकि इनका कोई कसूर नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि उपरोक्त वाक्या 2008 बैच की श्रीमती उर्मिला शुक्ला तथा 2010 बैच के अशोक चौहान को लेकर नहीं लिखा गया है…..। खबरची