मैहर को जिला जो बनायेगा मध्यप्रदेश में परचम लहरायेगा

विशेष रिपोर्ट: श्रीमती माया दास (मो. ७९८७९१०४२५)
मध्यप्रदेश में विन्ध्यांचल में जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी की सरकार का ग्राफ कई कारणों से गिरा है, वहीं दूसरी ओर 15 महीनों की कमलनाथ सरकार में सतना जिले को विभाजित करते हुए दो जिलों में बांटने का फैसला जब अधर में लटक गया, तो मैहर की देवी शारदा माई के भक्तों ने नाराजगी जाहिर कर दी है। लंबे अरसे के इंतजार के बाद आखिर धार्मिक नगरी मैहर को कमलनाथ सरकार की कैबिनेट में जिला बनाये जाने की मंजूरी मिली थी, जिसका लोगों ने पटाखें और मिठाई बांट-बांट कर खुशियां भी मनाई थी। मैहर की पली-बढ़ी और शिक्षा के क्षेत्र में अपने योगदान से मैं हमेशा संतुष्ट रही हूं, लेकिन जब मैहर को जिला घोषित करने के बाद क्रियान्वयन में राजनैतिक रूप से रोड़े अटकाये गये है, तो इस घटना से व्यथित होकर मैंने स्वयं मैहर को जिला नहीं बनाये जाने के कारणों पर काम करना शुरू कर दिया था। हालांकि मैहर के जिला घोषित होने के बाद मैहर तहसील, रामनगर तहसील और अमन पाटन को मिलाकर लगभग 10 लाख की आबादी को विकास की झलकियां नजदीक से देखने को मिल जाती, लेकिन राजनैतिक अहम ने मैहर जिले को आकार लेने से रोकते हुए, पूरे मध्यप्रदेश में शारदा देवी के भक्तों को केवल निराश ही नहीं किया है, नाराज भी कर दिया है। मैहर के विधायक नारायण त्रिपाठी और सतना संभाग संघर्ष समिति के आंदोलनकारियों को इस बात के लिए बधाई तो दी जानी चाहिए कि उन्होंने मैहर और चित्रकूट को जिला बनाने की आवाज बुलंद की थी, जिसमें मैहर को जिला घोषित होने से पूरे विन्ध्य अंचल में खुशियों की लहर दौड़ गई थी। ‘राष्ट्रीय हिन्दी मेलÓ के समूह में संपादकीय मंडल के अध्यक्ष होने के नाते मुझे यह कहने में अथवा लिखने में संकोच नहीं है कि विन्ध्य अंचल के अधिकांश जिलों में मैहर को जिला नहीं बनने देने के लिए यहां की जनता दोनों दलों के बड़े नेता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को बराबर का दोषी मान रहे हैं। हालांकि सतना में इस विषय को लेकर निष्क्रियता इसलिए है, क्योंकि उनका जिला छोटा हो जायेगा और ऐसी रिपोर्ट वहां पर तत्कालीन जिला कलेक्टर संतोष मिश्रा ने लिखी भी थी, जिससे उनके खिलाफ जनता ने आक्रोश भी जाहिर किया। खैर वक्त आया और चला गया, लेकिन शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के रूप में 2016 में मैहर को सार्वजनिक मंच से जिला घोषित करने वाले पहले राजनेता थे। जो उस समय कह गये, यदि हमने मैहर को जिला नहीं बनाया तो हमारे उ्मीदवार को वोट मत देना। उन्होंने यहां तक कहा था माता शारदा का मंदिर होने से मैहर में विकास की संभावनायें अद्भुद है और व्यवसायिक रूप से खाद्य प्रसंस्करण तथा खनिज संपदा से जुड़े उद्योगों के माध्यमों से बेरोजगारों को अवसर मिलेगा। उसके बाद दूसरी ओर 2018 में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी पहली चुनावी सभा का शुभारंभ मैहर से ही करते हुए कहा था कि उनकी सरकार बनते ही मैहर को जिला बना दिया जायेगा। कमलनाथ ने जिला बनाया, लेकिन प्रशासनिक क्रियान्वयन वे नहीं करा पाये, जिसे जनता मैहरवासियों के साथ विश्वासघात मानती है। खैर राजनीति में भाषण-आश्वासन सब जायज है, लेकिन इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब समझने के लिए मैं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ दोनों को आगाह करना चाहती हूं कि विन्ध्यांचल में मैहर जिला मध्यप्रदेश में सरकार बनाने वाले दोनों दलों के लिए 2023 के विधानसभा चुनाव में मिल का पत्थर है, इस बात को पत्थर की लकीर मानकर यदि निर्णय लिए गए तो, जो मैहर के साथ खड़ा होगा, वहीं माता शारदा देवी की कृपा से बड़ा होगा। यह विशेष रिपोर्ट इसलिए नहीं कि सतना/मैहर मेरा मायका रहा है, यह विशेष रिपोर्ट इसलिए है, क्योंकि राजनीति के पंडितों को कम से कम धार्मिक नगरी को जिले का आकार देने की परिकल्पना को लेकर जनता से वायदा करने के पहले सौ बार सोचना चाहिए था। परन्तु जब आप दोनों ने वायदे किये हैं, तो वायदों को पूरा करने का राजनीति से उपर उठकर साहस भी जुटाइये, फिर देखिये मध्यप्रदेश में राजनीति किस करवट बैठती है। इस विशेष रिपोर्ट से सरकार किसकी बनती है या किसकी नहीं बनती, इस बात से कोई संबंध नहीं है, लेकिन इस आशय की रिपोर्ट यह प्रमाणित करने के लिए काफी है कि जिसने मैहर को जिला बनाया उसका भी भला है, लेकिन जो मैहर जिले की प्रशासनिक अमले को क्रियान्वित करते हुए कलेक्टर, एसपी से लेकर निचले स्तर की नौकरशाही को स्थापित करने में सफलता हासिल कर लेगा, उनका उससे भी ज्यादा भला होगा, यह लिखने में मुझे किं चित संकोच नहीं है…।