कमिश्नर-कलेक्टर का शिक्षक प्रेम,सरकार की बढ़ी लोकप्रियता…

मध्यप्रदेश में जब किसी बड़े जिले में संभाग आयुक्त और कलेक्टर की प्राथमिकताओं में शिक्षक समा जाये, तो यह मान लेने में कोई हर्ज नहीं हैं कि एंटीइन्क्बेंसी फैक्टर को कम करने में यह मुद्दा अत्यन्त महत्वपूर्ण हो जाता है। “राष्ट्रीय हिन्दी मेल” की एक पड़ताल में यह बात खुलकर सामने आई है कि संस्कारधानी के नाम से लोकप्रिय भेड़ाघाट की वादियों में बसा जबलपुर के संभागायुक्त बी. चन्द्रशेखर तथा नये-नये आए युवा कलेक्टर सौरव सुमन ने अपनी प्राथमिकताओं में जबलपुर जिले के प्रायमरी से लेकर हॉयर सेकेण्ड्री तक के लगभग 1200 स्कूलों को शामिल कर लिया है। संभागायुक्त बी. चन्द्रशेखर ने इस प्रतिनिधि को एक संक्षिप्त मुलाकात में बताया कि वे और जिला कलेक्टर दोनों मिलकर जबलपुर के सभी स्कूलों में (सीएम राईज स्कूलों को छोड़कर क्योंकि यहां सभी सुविधाओं के लिए पूर्व से ही प्रावधान है) बुनियादी आवश्यकताओं को एक महीने के भीतर पूरा करने का फैसला कर लिया है। सूत्रों के अनुसार अब जबलपुर का कोई भी सरकारी स्कूल बिना बुनियादी सुविधाओं के संचालित नहीं होगा। सुविधाओं की जिन बातों का जिक्र कमिश्नर और कलेक्टर करते हैं, उनमें पहला तो यह है कि शिक्षकों की समस्याओं को स्मानजनक ढंग से निपटाया जायेगा। दूसरा मुद्दा है स्कूलों में स्वच्छ पेयजल, तीसरा मुद्दा है सभी स्कूलों में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था, चौथा मुद्दा है सभी स्कूलों में शौचालयों की पुख्ता इंतजाम तथा अंतिम एवं अतिमहत्वपूर्ण प्राथमिकता है शिक्षकों में अनुशासित ढ़ंग से अध्ययन कराने की परंपरा को लागू किया जायेगा। इसके अलावा शिक्षकों को स्कूलों में अन्य कई समस्याओं से बजट के अभाव में जूझना पड़ता है, लेकिन जबलपुर संभाग के सभी जिले अब जबलपुर जिले की तरह स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं से लैस रहेंगे। “राष्ट्रीय हिन्दी मेल” को शिक्षकों के एक प्रतिनिधि मंडल ने उपरोक्त फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि शिवराज सरकार की एंटीइन्क्बेंसी फैक्टर को सही मायने में कम करने की दशा में और सरकार को लोकप्रिय बनाने की दशा में इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता कि वहां पर शिक्षक खुश रहें…। कमलेश शर्मा