स्पोर्ट्स कोटे की गृह विभाग के अलावा किसी विभाग को खिलाडिय़ों की चिंता नहीं…

बड़ी-खबर: संदीप नेपोलियन
मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार के 52 शासकीय विभागों में गृह विभाग के अलावा कोई विभाग ऐसा जिम्मेदार नहीं निकला जिसने मध्यप्रदेश के खिलाडिय़ों के लिए खेल कोटे से सरकारी नौकरी देने का जज्बा दिखाया हो। खेल और खिलाडिय़ों का उत्साह बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार ने भले ही अलग-अलग खेलों में पारंगत खिलाडिय़ों को जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर के खेल स्पर्धाओं में मेडल पाना तो दूर केवल उत्कृष्ट खिलाड़ी के रूप में चयनीत होकर अपने खेल का प्रदर्शन भी किया हो तो उसके लिए भारत सरकार ने सभी राज्यों को ऐसे खिलाडिय़ों के लिए खेल कोटे में नौकरी देने का प्रावधान रखने का निर्देश दिया है और यह संसद में पारित विधेयक के बाद बनाई गई स्पष्ट नीति भी है। मध्यप्रदेश के खेल विभाग ने कभी यह जानने की कोशिश भी नहीं की, कि किन राज्यों में खेल कोटे में कितने प्रतिशत नौकरियां अब तक दी जा चुकी है और मध्यप्रदेश में इस कोटे काक्या हाल है। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि ने सूक्ष्म पड़ताल के बाद पाया कि हरियाणा जैसे छोटे राज्य में भी 3 प्रतिशत सरकारी नौकरियों में खिलाडिय़ों का कोटा ए,बी,सी एवं डी योग्यता के अनुसार निर्धारित है। परन्तु मध्यप्रदेश में इस प्रतिनिधि ने कई विभागों में पड़ताल करने के बाद जब आज गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा से मुलाकात करने के बाद इस विषय में जानकारी प्राप्त की, तो डॉ. राजौरा ने बताया कि पुलिस विभाग में उत्कृष्ट खिलाडिय़ों के लिए 60 पदों पर सीधी भर्ती का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि 50 आरक्षक एवं 10 उपनिरीक्षक प्रतिवर्ष पुलिस विभाग में भर्ती किये जाने के लिए विशेष चयन समिति बनाई गई है, जिसके माध्यम से सीधी भर्ती की जायेगी। यह चौंकाने वाला वाक्या है कि, मध्यप्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने खिलाडिय़ों को लेकर कोई सक्रियता ऐसी नहीं दिखाई, जिससे उत्कृष्ट खिलाडिय़ों को सभी शासकीय विभागों में खेल कोटे के अंतर्गत नौकरियाँ उपलब्ध कराई जा सके और उनका स्मानजनक जीवन जीने का अवसर उन्हें हमेशा मिलता रहे। राष्ट्रीय हिन्दी मेल ने लगातार खिलाडिय़ों को लेकर, मध्यप्रदेश में आगामी 31 जनवरी 2023 से होने वाले खेलो इंडिया यूथ के आयोजन को लेकर हमेशा जागरूकता का काम किया है, जिसकी वजह से आज मध्यप्रदेश की खेल एवं युवा मंत्री श्रीमती यशोधराराजे सिंधिया ने बढ़-चढ़कर खिलाडिय़ों के हक में बेहतर से बेहतर अनुशासित ढंग़ से काम करने के लिए खेल संचालक सहित सभी अधिकारियों एवं कोचो को फटकार भी लगाई है। श्रीमती सिंधिया का इस तरह सक्रिय हो जाना मध्यप्रदेश के खेल एवं खिलाडिय़ों के भविष्य को निश्चित रूप से बेहतर बनाएगा, लेकिन श्रीमती सिंधिया को यह जानकारी अभी मुहैया नहीं है कि, मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार के किन-किन विभागों में खेल कोटे से सरकारी नौकरियों में भर्तियां की जा रही है और कितनी है। बता दें कि, खेल और खिलाडिय़ों को प्रमोट करने के लिए भारतीय रेलवे, भारतीय सेना, पुलिस समेत कई सरकारी संस्थान अपने यहॉ सरकारी नौकरियों में मेधावी खिलाडिय़ों की सीधी भर्ती किया करते है, इससे खिलाडिय़ों को जॉब और पैस मिलने के साथ-साथ आत्मबल तो बढ़ता ही है, साथ ही उनके अन्दर बढ़ता है देश के लिए कुछ करने का जज्जा भी, परन्तु मध्यप्रदेश में नीतियों के क्रियान्वयन का लच्चर पन खिलाडिय़ों के लिए उत्साहजनक नहीं है, यह बात बात-बात पर नाराज होने वाली है, खेल एवं युवा मंत्री को समझना भी जरूरी है, वरना वही होगा मेडल पाने के लिए दूसरे राज्यों से खिलाड़ी आयात होते रहेंगे और मध्यप्रदेश के युवा खिलाडिय़ों को अनाथ जैसी जिंदगी जीने के लिए सरकार मजबूर करती रहे, तो चौंकिएगा मत….।