राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा कमलनाथ से आगे निकल गये दिग्विजय

संडे डायरी : विजय कुमार दास ( मो. 9617565371 )
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के सितारे दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के सितारों को कमजोर करने में अब पूरी तरह कामयाब हो चुके है, यह बात अखबारों की सुर्खियों में नहीं बल्कि कांग्रेस के गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कांग्रेस के सुप्रीमों राहुल गांधी को विपक्ष की राजनीति के लिए देश की सबसे बड़ी जरूरत बताने का काम करने के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अहम भूमिका निभाई है। राजनीति में पद यात्रा का कितना महत्व है, इस बात को राहुल गांधी तक पहुंचाने में और उन्हें पद यात्रा के लिए तैयार करने में बताते है दिग्विजय सिंह को 6 महीने लग गए। जब राहुल गांधी को दिग्विजय सिंह ने महात्मा गांधी की दांडी यात्रा तथा आजाद भारत में भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक लालकृष्ण आडवानी की रथ यात्रा से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पदयात्रा के महत्व को समझाया तथा अपनी नर्मदा यात्रा का जिक्र किया तो राहुल गांधी के कान खड़े हो गए, उन्होंने दिग्विजय की बात को समझ लिया कि जनता से जुडऩे के लिए भारत जोड़ो यात्रा से बेहतर कोई अभियान आज की तारीख में संभव ही नहीं है। इसी अवधारणा के चलते राहुल गांधी ने दिग्विजय सिंह की बात पर भारत जोड़ो अभियान की तैयारी का ज्मिा भी दिग्विजय सिंह को सौंपकर राहुल गांधी पद यात्रा पर निकल पड़े। बता दें कि, कन्याकुमारी से कश्मीर तक की यात्रा इस यात्रा में राहुल गांधी जो बोल रहे है और जो जनता समझ रही है, उससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नाराज नहीं है बल्कि खुश है, यह लिखने में इसलिए संकोच नहीं है क्योंकि नरेन्द्र मोदी को भी विपक्ष में नेहरू गांधी परिवार ही पसंद आता है, या यह रहस्य देश की जनता को या राजनैतिक विश्लेषकों को समझ में आने लगी है,क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसी भी सुरत में आम आदमी पार्टी को मिलाकर क्षेत्रीय पार्टियों के साथ नितिश कुमार, केजरीवाल और ममता बैनर्जी को मजबूत होते देखना नहीं चाहते। इसलिए राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में कांगे्रस की भीड़ चाहे जितनी हो, जनता के सैलाब उमडऩा भारत जोड़ो यात्रा की सफलता की कहानी को इतिहास के पन्नों में दर्ज जरूर कराएगी। जहा तक सवाल है मध्यप्रदेश में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का तो इस संडे डायरी में यह लिखने में संकोच नहीं है कि, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भारत जोड़ो यात्रा की योजना बनाकर गांधी परिवार से अपने संबंधो की प्रगाढ़ता को स्थापित करने में सफलता तो हासिल की है और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को काफी पीछे छोड़ दिया है। रहा सवाल राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का 2023 के विधानसभा चुनाव मेंक्या असर हो सकता है, इसका उत्तर भविष्य के गर्भ में है, लेकिन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए और उनकी सरकार की कार्यशैली के लिए बहुत सारे प्रश्न चिन्हों को रेखांकित कर जाए तो आश्चर्यजनक कोई घटना नहीं होगी…।