9 राज्यों में भाजपा को लागू करना होगा गुजरात मॉडल

नई दिल्ली से विशेष रिपोर्ट: विजय कुमार दास (मो. 9617565371)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मिनी रोड़ शो मेगा प्रोग्राम के साथ आज शुरू हुई पहले दिन की राष्ट्रीय कार्य समिति ने भारतीय जनता पार्टी में व्यापक परिवर्तनों तथा राजनैतिक बदलावों के संकेत दे दिए हैं। भाजपा की राष्ट्रीय कार्य समिति के आज केन्द्र बिन्दु में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रसाद नड्डा ही रहे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपलब्धियों का बखान तथा हिमाचल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की मामूली हार ने समुची कार्यसमिति के उद्देश्य को झकझोर दिया था। समझा जाता है कि राष्ट्रीय कार्य समिति में आज प्रधानमंत्री की उपलब्धियों के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी के सामने जिन 9 राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं, उन राज्यों में मिलने वाली चुनौतियों पर गंभीरता से चर्चा की गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रसाद नड्डा के कार्यकाल को बढ़ाने के जैसा या उनके स्थान पर किसी वैकल्पिक व्यवस्था करने जैसा कोई संकेत आज बिल्कुल नहीं मिला। अलबत्ता जिस राज्यों से प्रतिवेदन आये थे उनमें छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों में संगठन के मामलों में फिसड्डी दिखाई पड़े, लेकिन मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मन की बात को जमकर सराहा गया। कार्य समिति की बैठक के बाद जब पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पूर्व केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पत्रकारों से यह कहा कि अध्यक्ष जी ने यह स्वीकार किया है कि हिमाचल राज्य में यदि गुजरात मॉडल लागू किया जाता तो भाजपा वहां चुनाव नहीं हारती। श्री प्रसाद ने उपरोक्त वाक्य से पूरे पत्रकार गैलरी में एक मिनट के लिए सन्नाटा फैल गया और पत्रकारों ने यह सवाल पूछने से अपने आप को नहीं रोक पाए, कि हिमाचल राज्य में हार की सबक को लेकर क्या भारतीय जनता पार्टी आगामी 9 राज्यों में होने वाले विधानसभा के पहले गुजरात मॉडल लागू करेगी? इस सवाल के उत्तर में रविशंकर प्रसाद ने केवल इतना ही कहा कि उन्होंने पत्रकारों के सामने अध्यक्ष के भाषण को यथावत रखने की ज्मिेदारी निभाई है। इसलिए इस सवाल का उत्तर अध्यक्ष ही दे सकते है। यूं कहा जाए कि राष्ट्रीय समिति में आज राजनैतिक प्रस्तावों के साथ भारतीय जनता पार्टी ने हर हाल में विधानसभा के चुनावों को सभी 9 राज्यों में जीतने के लिए शंखनाद कर दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रताप नड्डा ने जब यह घोषणा की कि पिछली कार्य समिति ने हारी हुई 120 लोक सभा क्षेत्रों में 72 हजार पोलिंग बूथों पर काम किया था, तो उसमें 80 सीटें भाजपा जीत गई और यह प्रयोग भाजपा का सफल रहा। इसलिए इस बार भाजपा अब हारी हुई 160 लोक सभा सीटों पर 1 लाख 32 हजार मतदान केन्द्रों पर काम करेगी। कार्य समिति ने समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हम सबको सबसे पहले उसी व्यक्ति के बारे में काम करना होगा जो अंतिम छोर पर खड़ा है और वहीं व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी के विश्वास और भरोसे के सबसे बड़ा कारण है। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि की पड़ताल में आज यह लिखे जाने में संकोच नहीं है कि यदि 9 राज्यों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने गुजरात मॉडल लागू करने का फैसला कर लिया तो फिर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान मिलाकर कोई भी राज्य अछूता नहीं रहेगा, जहां विधानसभा के चुनाव इस वर्ष होने है। ऐसी स्थिति में यह मान लेने में कोई हर्ज नहीं है कि जिन नेताओं की कतार से नए मुख्यमंत्री का नाम आएगा उसका मध्यप्रदेश में कमलनाथ को चुनाव में पराजित करने की क्षमताओं का भी आक्कलन किया जाएगा। इसलिए यह मान लेना भी गलत नहीं होगा कि महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेन्द्र तोमर, प्रहलाद सिंह पटेल और नरोत्तम मिश्रा के चेहरे कार्य समिति के संकेतों के बाद चुनौतियों से लडऩे की तैयारियों में जुट गया होंगे। इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि नडडा ने अपने भाषण कहा कि हिमाचल में हमारी पार्टी ने गुजरात मॉडल को लागू नहीं किया इसलिए वहां भाजपा को हार का सामना करना पड़ा भले ही हार का अन्तर मामूली था। उन्होंने कहा कि इस साल होने वाले 9 राज्यों के विधानसभा चुनाव में गुजरात मॉडल को लागू करके ही लड़ा जायेगा। अध्यक्ष नड्डा ने कहा कि अब कोई भी चुनाव हारा नही जायेगा सभी 9 राज्यों में लीडरशिप में बदलाव किया जायेगा आदिवासी, दलित, पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए मौका दिया जाएगा। जेपी नडडा ने नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए पंच प्राणों पर भी प्रकाश डाला जिसमें औपनिवेशिक अतीत के निशानों से मुक्ति, भारत की परंपरा पर गर्व करना, विकसित भारत बनाने की प्रतिबद्धता, विविधता में एकता और राष्ट्र के प्रति नागरिकों को ज्मिेदार बनाना शामिल है। कुल मिलाकर यह माना जाए कि राष्ट्रीय कार्य समिति की आज तक चलने वाली बैठक में यह स्पष्ट संकेत दे दिये गये है कि भारतीय जनता पार्टी हाईकमान उन सभी राज्यों मे नेतृत्व परिवर्तन कर सकती है, जिन 9 राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने है और इन राज्यों में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान भी शामिल है। इसलिए आज यह पता लग जाएगा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पार्टी में बदलावों के लिए किस सीमा तक जाने के लिए तैयार है।