अचानक प्रकट हुए भाजपा में प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी…

भारतीय जनता पार्टी एक ऐसा राजनैतिक दल है जहां व्यक्ति वहां तक पहुंच जाता है, जिसके बारे में उसने कभी सोचा नहीं होगा और यह काम भारतीय जनता पार्टी में ही संभव है। इसी श्रृखंला में पहले मध्यप्रदेश में भाजपा ने सुश्री अनसुईया उइके को राज्यसभा सदस्य बनाया और अब वे छत्तीसगढ़ की राज्यपाल है। अब फिर दुबारा भाजपा ने ऐसे व्यक्तित्व को लेकर अपनी परंपरा को कायम रखने की कोशिश की है, जिसके अंतर्गत मालवा-निवाड़ के सर्वाधिक पढ़े लिखे बुद्धिमान प्राध्यापक प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी को राज्यसभा का सदस्य बनाया है, जिसकी यात्रा अब और आगे निकलने वाली है। खबर यह है कि, प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी की भूमिका में भारतीय जनता पार्टी हाई कमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों ने मिलकर बड़े बदलाव करने का निर्णय लिया है, जिसके अंतर्गत संगठन के प्रमुख आदिवासी चेहरे के रूप में प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी को मैदान में उतारा जाएगा। दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में बिल्कुल शामिल नहीं है, वे तो संगठन में ज्मिेदारी मिलने की खबर से ही बेहद आतुर भी है और खुश भी है। समझा जाता है कि, 2018 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा के टिकट वितरण में सही उ्ीदवारों की उपेक्षा की थी, जिसकी वजह से 30 से अधिक सीटों पर कांग्रेस ने आदिवासियों को विधायक बना लिया था। 2018 की गलतियों को दोहराने के पक्ष में विशेषकर आदिवासी मामले में भाजपा अब तैयार नहीं है और प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी को आदिवासी चेहरे के रूप में भारतीय जनता पार्टी कुछ ही दिनों में अचानक प्रकट कर दे, तो चौंकिएगा मत। क्योंकि, मध्यप्रदेश में राजनीति और राजनीति में पढ़े लिखे आदिवासी का होना, अपने आप में उस राजनैतिक दल के लिए सबसे बड़ी पूँजी है, जो सत्ता में है। और इसलिए प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी की ईमानदारी का सफर समझिए, जब उन्हें राज्यसभा का टिकट दिया गया तो, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इनके प्राध्यापक पद का इस्तिफा मंजूद करने को तैयार नहीं थे। लेकिन जब तत्कालीन प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई ने उन्हें आश्वासन दिया कि, वे मुख्यमंत्री को सहमत कर लेंगे, आप चिंता मत करिए, तो डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने कहा था कि, अगर मेरा इस्तिफा मंजूर नहीं हुआ तो मैं राज्यसभा में नहीं जाऊंगा। उनकी इस सज्जनता और ईमानदारी को लेकर जब प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई ने तबके उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास गए और उन्हें समझाया कि, प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी अच्छी छवि वाले ईमानदार व्यक्ति है, इसलिए उनका इस्तिफा मंजूर किया जाना उचित होगा, और यह बात सुनकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने उनका इस्तिफा मंजूर कर लिया और प्रोफेसर साहब राज्यसभा में पहुंच गए अब देखिए आगे-आगे…। खबरची