मंत्रियों की बेचैनी समाप्त 5 फरवरी के बाद ही होंगे बदलाव

विशेष रिपोर्ट:विजय कुमार दास (मो. 9617565371)
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्य समिति समाप्त होते मध्यप्रदेश सहित आठ राज्यों में भी संगठनात्मक बदल के संकेत मिलने लगे है। समझा जाता है कि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों एक मत हो चुके है कि, यदि नौ राज्यों में चुनाव की वैतरणी को पार करना है तो, फिर गुजरात फॉर्मूला ही एक विकल्प है। इसलिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को इन दोनों शिखर के नेताओं ने 21 जनवरी से 5 फरवरी तक अवकाश पर भेज दिया है। सूत्र बताते है कि, श्री नड्डा के अवकाश के दिनों में बड़े फैसले लिये जाएंगे, जिसमें मध्यप्रदेश राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मूलभूत ढ़ाँचे में ही परिवर्तन कर दिया जायेगा। जहां तक सवाल है मध्यप्रदेश का बताया जाता है कि, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हटाये बिना ही 2023 के लिए केन्द्रीय मंत्री महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी मुख्यमंत्री पद के उ्मीदवार के लिए प्रमुख चेहरे के रूप में प्रस्तुत करेगी और शिवराज सिंह चौहान से कहा जाएगा कि, वे सिंधिया के साथ मध्यप्रदेश के हर जिले में विकास यात्राएं निकालेंगे लेकिन मंत्री मण्डल का पुर्नगठन मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर जरूर कर दे। सूत्रों के अनुसार शिवराज सरकार के एक दर्जन मंत्रियों को मिलाकर भारतीय जनता पार्टी अपने 50 से 55 विधायकों की टिकट भी काट सकती है। इसी के चलते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अलग-अलग चार सौत्रो से सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों के लिए जिताऊ उम्मीदवारों की खुफिया रिपोर्ट तैयार कराई है जिसके अनुसार ही 50 से 55 विधायकों के टिकट कट जाने के आसार नजर आने लगे है। समझा जाता है कि, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस बात के लिए सहमत कर लिया गया है कि, वे 2030 के विधानसभा चुनाव में गुजरात फॉर्मूले के आधार पर मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए किसी भी नए चेहरे को साथ लेकर भाजपा को जिताने के लिए अमित शाह के द्वारा दिये गये मध्यप्रदेश के 200 पार के नारे को सफल बनाएंगे। रहा सवाल मध्यप्रदेश में संगठन और मंत्रिमण्डल में पुर्नगठन इन दोनों में परिवर्तन के संकेत मुख्य है लेकिन, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा आत्मविश्वास से लवरेज है, उन्हें लग रहा है कि, जे.पी. नड्डा की तरह उनका भी कार्यकाल बढ़ाया जाएगा। जहां तक सवाल है मंत्रिमण्डल के पुर्नगठन का तो फिलहाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पार्टी हाई कमान ने फ्री हेन्ड दे दिया है, लेकिन साथ में यह भी कहा है कि, भ्रष्टाचार में लिप्त यदि कोई मंत्री पाया जाता है, तो उसे बर्खास्त भी कर दिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार फिलहाल मध्यप्रदेश के सभी मंत्री अपनी-अपनी बेचैनी से दूर है, लेकिन 5 फरवरी के बाद एक दर्जन मंत्रियों का नंबर भाजपा के आर्शीवाद मण्डल में लग जाए तो चौंकाने वाली कोई घटना नहीं होगी। अब ऐसी स्थिति में इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह कहता है कि, मंत्रिमण्डल का पुर्नगठन निश्चित है और नये मंत्री कौन-कौन शामिल होंगे यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन 65-70 साल के ऊपर के मंत्रियों का पत्ता साफ हो जाए, तो चौंकिएगा मत।