‘मामा-बुलडोजर’ का ऐसे लोगों पर कब होगा प्रहार…?

सरकार की नीतियों के खिलाफ डंके की चोट में करते हैं, अवैध कारोबार
माफिया नहीं है तो क्या हुआ, नौकरशाहों की आँखों में धूल झोंककर

कड़वी खबर: विजय कुमार दास ( मो 9617565371)
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डंके की चोट में एन्टी माफिया अभियान चलाकर खनिज माफिया, भू- माफिया, रेत माफिया और ना जाने अलग-अलग ढंग से सरकार की आँखों में धूल झोंककर अपराधों को अंजाम देने वाले माफियाओं के खिलाफ मामा-बुलडोजर चलाकर जो गुड- गर्वंनेन्स का संदेश देने का प्रयास किया था वह उनका एक भागीरथी प्रयास था, जिसे उन रसूखदार छुपे रूस्तमों ने पानी फेर दिया है। और तो और सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी स्वयं की नीतियों पर नौकरशाहों को अपने सत्ता के शिखर से संबंधों का झांसा देकर हजारों करोड़ के सरकारी राजस्व को चुना लगाने में महारथ हासिल कर ली है, ऐसा माना जाये तो, चौंकाने वाला वाक्या बिल्कुल नहीं है। सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश में स्मार्ट सिटी के सपनों को पूरा करने वाले नगर निगम आयुक्तों को अभी तक यह अंदाज नहीं लग पाया है कि, जो माफिया नहीं है और बिल्डर का काम करते है, वे लोग भी नगर निगमों के राजस्व में किस तरह डांका डालते है, यदि उसकी जांच हो जाए तो पूरे मध्यप्रदेश में केवल हंड़कंप ही नही मचेगा, बल्कि यूं कहां जाए कि, जिन नगर निगमों को तन्खा बांटने के लिए वित्तीय संकटों का सामना करना पड़ता है, उससे वे निजात पा सकते है। उदाहरण के तोर पर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ही बड़े-बड़े बिल्डर जिन्हें आप, भू-माफिया भले न कहें, लेकिन आनंद नगर, मिनाल रेसिडेन्सी, मिनाल-2 से लेकर कोलार, बैरागढ़ चिचली तथा मिसरोद से लेकर करोंद कहीं भी पता लगाया जा सकता है कि, नगर निगमों से बिना कंपलिशन सर्टिफिकेट लिये ये सब बड़े लोग विकास शुल्क दुकानदारों से, शादी हॉलों से, कान्फ्रेस हॉलो से बेदर्दी से वसूलते हैं, और नगर निगम को पता भी नहीं चलता। सूत्रों का कहना है कि, नगर निगमों से ये सब रसूखदार बिल्डर क्िप्लशन सर्टिफिकेट जानबूझकर नहीं लेते और वर्षों नगर निगमों को विकास शुल्क, प्रापर्टी टैक्स नहीं मिलता, लेकिन नगर निगम आयुक्त इन सब छिपे रूस्तमों के खिलाफ ना तो जांच करता है और ना ही ऐसी कार्रवाई करता है, जिससे नगर निगम को करोड़ो के राजस्व के घाटे से बचाया जा सकता है। भोपाल के नगर निगम आयुक्त वी.के.एस. चौधरी कोलसानी कोरोना पीडि़त परिवारों को टैक्स ना देने पर कुर्की की नोटिस तो चिपका रहे है, लेकिन ऐसे भू-माफियाओं के खिलाफ मामा का बुलडोजर चलाने में अपने आपको यह कहकर पीछे कर लेते है कि, क्या करें ऊपरवाले कोई कार्रवाई नहीं करने देते, जबकि ऐसा नहीं है, मामा ने तो डंके की चोट पर कहां है कि, मैं किसी भी माफिया को छोडूंगा नहीं। हालांकि ये करोंड़ो अरबों के राजस्व का चूना लगाने वाले लोग माफिया की श्रेणी में अभी तक नहीं आये है, यह आश्चर्य की बात हैं। आप तो यह जानकर भी चौंक जाएंगे कि, राजधानी में एक बिल्डर ने एमआईडीसी (मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) की जमीन पर बिना अनुमति के मकान बनाकर बेच दिया है और उन मकानों में रहने वाले खरीददारों को कोई बैंक इसलिए लोन नहीं दे रहा है, क्योंकि मकानों में एमआईडीसी की एनओसी नहीं है। मतलब सैकड़ों लुटे-पिटे खरीददार उस बिल्डर से दबे हुए है, इसकी शिकायत हालांकि, प्रबंध संचालक उस आईएएस अधिकारी मनीष सिंह को मिल चुकी हैं, जिसने हाल ही में इंदौर कलेक्टर के रूप में ऐसे बड़े-बड़े तथाकथित रसूखदारों के भूत उतारकर यहां आए हैं। और इसी तरह मध्यप्रदेश के जितने भी नगर-निगम है, वहां पर भी उपरोक्त कंपलिशन सर्टिफिकेट नहीं लेने तथा नगर निगमों को चूना लगाने का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है और यह सब सरकार की नीतियों के खिलाफ है, लेकिन इन्तजार है सबको मामा-बुलडोजर का, कि कब चलेगा…? ठीक इससे आगे बढ़कर दूसरा मामला रेत कारोबार का है, जिसमें रेत माफिया शामिल नहीं है वे सब ठेकेदार है और सबके साथ डंके की चोट में खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह तथा भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रति पल खड़े हुए है, ऐसा इनका दावा भी है और कुछ तो यहां तक कहते है कि, अघोषित रूप से मंत्री जी की साझेदारी भी है, मतलब सैंया भये कोतवाल, अब डर काहेका, इसलिए राम नाम की लूट है, लूट सको तो लूट खूब चल रहा है और मामा का बुलडोजर यहां पर भी कमजोर पड़ गया है, इसमें संदेह नहीं है। बता दें कि, इन सभी रसूखदारों ने नीतियों के खिलाफ अपनी नीतियां बनाकर अभी तक राज्य सरकार को एक अनुमान से लगभग 600 करोड़ का नुकसान पहुंचा दिया है और कलेक्टर छतरपुर हो या पन्ना, भिण्ड हो या बैतूल, सीहोर हो या होशंगाबाद सब के सब इनके रसूख के आगे खामोश है। सूत्रों के अनुसार नीजि भूमियों में जहां-जहां रेत है, उन खेतों को भूमि स्वामियों के ऊपर दंबगाई से बिना अनुमति के रेत निकालने वाले ठेकेदारों को कलेक्टर कुछ नहीं कर पा रहे है और ना ही मुख्यमंत्री को सूचित कर पा रहे है कि, यहां गड़बड़ चल रहा है, उसके पीछे सिर्फ एक ही कहानी है, ठेकेदार कलेक्टर से कह देते है, हाथ मत डालना यहां सब ऊपरवाले हमारे साथ है। और तो और नर्मदापुरम में तो सीहोर के ठेकेदार ने नीजि भूमियों पर नीतियों को पलिता लगाकर अपने ऊपर कोई शासकीय बकाया नहीं होने का शपथ-पत्र लगाकर रेत उत्खनन की अनुमति तक ले ली है, जबकि नमर्दापुरम के ठेकेदार का प्रकरण अभी निरस्त ही नहीं किया गया है, जिसकी सहमति अनुमति के लिए अनिवार्य है। कुल मिलाकर इस कड़वी खबर का लब्बोलुआब यह है कि, खनिज विभाग के प्रमुख सचिव निकुंज श्रीवास्तव भी इस घटना से बेखबर है कि, छतरपुर और पन्ना में, सीहोर और नर्मदापुरम, बैतूल और जबलपुर में, दतिया और श्योपुर में नीजि भूमि पर बेसहारे भूमि स्वामियों के खेतों में बड़ी-बड़ी पोकलेन मशीनें रेत निकाल रही है, और मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान के एन्टी मॉफिया अभियान पर पलिता लगाते हुए सरकार की छवि खराब होने की चिंता किसी भी निचले स्तर की नौकरशाही को नहीं है, और ऐसी घटनाओं से शिवराज सरकार के खिलाफ एन्टी इन्क्बेंसी फेक्टर बढ़ जाये तो चौंकिएगा मत…।