शिवराज ने जिस कलेक्टर को छोटी सी शिकायत पर हटाया उसी आईएएस अधिकारी को बेहतर काम के लिए निर्वाचन आयोग अवार्ड देगा आज

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निवाड़ी जिले के तत्कालीन कलेक्टर आईएएस अधिकारी तरूण भटनागर को स्थानीय एक छोटी सी शिकायत पर आम जनता के सामने भरी सभा में मंच पर से तत्काल हटाने का आदेश दे दिया था। और मुख्यमंत्री के उस आदेश के कारण तरूण भटनागर अपनी बिरादरी में, अपने परिवार में और समाज में जलालत महसूस कर रहे थे, लेकिन आज वे गर्व से सर उठाकर चलने की स्थिति में पहुंच जाएंगे। बताया जाता है कि, भारत के निर्वाचन आयोग ने उन अधिकारियों को पुरूस्कृत करने का निर्णय लिया है, जिन अधिकारियों ने 18 वर्ष के युवा मतदाताओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अवधारणा के अनुरूप मतदाता सूची में जोडने के लिए मोटिवेशन का काम किया है। इसी श्रृखंला में निवाड़ी में कलेक्टर रह चुके युवा आईएएस अधिकारी तरूण भटनागर द्वारा 18 वर्ष की आयु के युवा मतदाताओं को मतदाता सूची में जोडने के लिए कलेक्टर के रूप में अहम भूमिका निभाई थी और उनकी इस बड़ी पहल के लिए आज भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह (मिन्टो हॉल) में उन्हें सनित किया जाएगा। विडंबना देखिए कि, कलेक्टर इन्स्टीट्यूशन का बड़े से बड़ा और अच्छे से अच्छा काम छोटी सी एक राजनैतिक शिकायत के कारण रद्दी की टोकरी में चला जाता है। खैर राजनीति में पंडितो का कहना है कि, मुख्यमंत्री जी जानबूझकर ऐसा कभी नहीं करते, लेकिन जब झूठी शिकायतें सच में परिवर्तित होने लग जाए तो वे अपना आपा खो जाते है, उसमें उनकी कोई गलती भी नहीं थी, क्योंकि लोकनीति ऐसा करने के लिए कई बार मुख्यमंत्री को मजबूर करती है। कुल मिलाकर कभी-कभी ऐसे फैसले कलेक्टर इन्स्टीट्यूशन की साख पर बट्टा लगाने के बड़े कारण भी बनते है, इसलिए यह अपेक्षा करना गलत नहीं होगा कि, कलेक्टर इन्स्टीट्यूशन के खिलाफ फैसला लेने से पहले इससे होने वाले प्रतिकूल प्रभावों के बारे में राज नेता को जरूर सोचना चाहिए, यदि वे सचमुच में जन-नायक है…। खबरची